कोर्ट का बड़ा आदेशः जन्म देने वाली मां को ही मिलेगा बच्ची रखने का हक, बहुत मार्मिक है पूरी कहानी
यह बच्ची स्पेशल चाइल्ड है जिसका जन्म चार जून, 2010 को कनाडा में हुआ था। बच्ची के जन्म के बाद प्रीति (परिवर्तित नाम) और उसके पति के बीच रिश्ते में खटास आनी शुरू हो गई। रिश्ते इस कदर खराब हो गए 18 जनवरी 2012 को दोनों के बीच तलाक हो गया। इस दौरान बेटी की देखभाल व उसके कॅरिअर के मद्देनजर प्रीति ने बेटी को भारत में रह रही अपनी मां के पास रख दिया।
चूंकि उसे विदेशी अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़नी थी, इसलिए प्रीति ने बेटी को अपनी मां के पास रखना ही बेहतर समझा। प्रीति ने अपनी मां को भारत में बच्ची को अभिभावक बनाया था। प्रीति की मां अपनी छोटी बेटी और दामाद के साथ बेंगलूरू में रहती थी। उनकी कोई संतान नहीं थी लिहाजा वह अपनी बहन (प्रीति) की बच्ची की देखभाल और पालन-पोषण करती थी। दोनों बहनों के बीच ई-मेल से हुए संवाद में प्रीति ने बच्ची को गोद देने का प्रस्ताव भी रखा था।
कुछ समय बाद प्रीति ने अपनी बहन से बच्ची को वापस देने के लिए कहा लेकिन बहन ने इनकार कर दिया। यहां तक कि मार्च 2015 में जब प्रीति भारत आई थी तो उसकी बहन ने मां-बेटी को मिलने तक नहीं दिया। इसके बाद प्रीति अपनी बेटी को वापस पाने के लिए पुलिस के पास गई लेकिन सफलता न मिलने पर उसने हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस की याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने बहन व उसके पति को बच्ची की कस्टडी प्रीति को सौंपने का निर्देश दिया।
प्रीति की बहन व उसके पति ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि इतने वर्षों से बच्ची की परवरिश करने के कारण उनका बच्ची से लगाव हो गया है और बच्ची उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। उन्होंने पीठ को बताया कि प्रीति ने बच्ची को गोद देने की बात कही थी। उनका कहना था कि सामाजिक रीतियों के तहत उन्होंने कानूनी तौर पर बच्ची को गोद लिया था। लेकिन पीठ ने उनकी दलीलों को नकारते हुए बच्ची को जन्म देने वाली मां प्रीति को सौंपने का आदेश दिया।