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कोर्ट का बड़ा आदेशः जन्म देने वाली मां को ही मिलेगा बच्ची रखने का हक, बहुत मार्मिक है पूरी कहानी

Fri, 01 Jun 2018 10:10 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Jun 2018 10:10 AM IST
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supreme court orders in a matter that mother who gave birth to girl have right to keep her
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
वर्षों तक एक बच्ची का पालन करने वाली मां की गोद एक बार फिर सूनी हो गई। परवरिश करने वाली मां बच्ची की कस्टडी पाने में असफल रही और वह बच्ची की असली मां से कानूनी जंग हार गई। सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी जन्म देने वाली मां को सौंपने का निर्देश दिया है। पढ़ें यह पूरी कहानी जिसे सुनकर आपका दिल पसीज जाएगा...
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baby hold mother hand

यह बच्ची स्पेशल चाइल्ड है जिसका जन्म चार जून, 2010 को कनाडा में हुआ था। बच्ची के जन्म के बाद प्रीति (परिवर्तित नाम) और उसके पति के बीच रिश्ते में खटास आनी शुरू हो गई। रिश्ते इस कदर खराब हो गए 18 जनवरी 2012 को दोनों के बीच तलाक हो गया। इस दौरान बेटी की देखभाल व उसके कॅरिअर के मद्देनजर प्रीति ने बेटी को भारत में रह रही अपनी मां के पास रख दिया।

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मां तुम्हारा शुक्रिया

चूंकि उसे विदेशी अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़नी थी, इसलिए प्रीति ने बेटी को अपनी मां के पास रखना ही बेहतर समझा। प्रीति ने अपनी मां को भारत में बच्ची को अभिभावक बनाया था। प्रीति की मां अपनी छोटी बेटी और दामाद के साथ बेंगलूरू में रहती थी। उनकी कोई संतान नहीं थी लिहाजा वह अपनी बहन (प्रीति) की बच्ची की देखभाल और पालन-पोषण करती थी। दोनों बहनों के बीच ई-मेल से हुए संवाद में प्रीति ने बच्ची को गोद देने का प्रस्ताव भी रखा था।

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baby

कुछ समय बाद प्रीति ने अपनी बहन से बच्ची को वापस देने के लिए कहा लेकिन बहन ने इनकार कर दिया। यहां तक कि मार्च 2015 में जब प्रीति भारत आई थी तो उसकी बहन ने मां-बेटी को मिलने तक नहीं दिया। इसके बाद प्रीति अपनी बेटी को वापस पाने के लिए पुलिस के पास गई लेकिन सफलता न मिलने पर उसने हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस की याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने बहन व उसके पति को बच्ची की कस्टडी प्रीति को सौंपने का निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट

प्रीति की बहन व उसके पति ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि इतने वर्षों से बच्ची की परवरिश करने के कारण उनका बच्ची से लगाव हो गया है और बच्ची उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। उन्होंने पीठ को बताया कि प्रीति ने बच्ची को गोद देने की बात कही थी। उनका कहना था कि सामाजिक रीतियों के तहत उन्होंने कानूनी तौर पर बच्ची को गोद लिया था। लेकिन पीठ ने उनकी दलीलों को नकारते हुए बच्ची को जन्म देने वाली मां प्रीति को सौंपने का आदेश दिया।

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