मुकदमों की सुनवाई के लिए पुलिस आरोपियों को कोर्ट में पेश करती है, लेकिन 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में दोषियों को सजा सुनाने के लिए मंगलवार को जेल में अदालत लगी। यह दूसरी बार है जब किसी मामले की सुनवाई के लिए संबंधित जज को जेल जाकर अदालत लगानी पड़ी।
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sikh riots verdict
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के मामले में संबंधित जज ने जेल में सुनवाई की थी।हालांकि पत्रकारों व अन्य लोगों को चकमा देने के लिए पुलिस के जवान देर शाम तक कोर्ट परिसर में जम रहे। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडेय की अदालत में सजा सुनाई जानी थी। जज करीब दो बजे अपने चैंबर से कोर्ट रूम में आ गए, लेकिन कुछ समय बाद ही चैंबर में लौट आए।
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इसके बाद तिलक मार्ग थाना प्रभारी उनसे आकर मिले, फिर बाद जज साहब कोर्ट रूम से चले गए। दरअसल जेल से केस की सुनवाई का निर्णय दिल्ली पुलिस की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिक पर अनुमति मिलने के बाद लिया गया था। जज अजय पांडेय जब देर तक वापस नहीं लौटे तो पत्रकारों ने अन्यत्र सुनवाई के कयास लगाने शुरू कर दिए। कुछ लोग लॉकअप की ओर गए और वहां पता किया।
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इसके बाद कुछ लोग जिला न्यायाधीश की कोर्ट की ओर गए। वहां पता चला कि न्यायाधीश अजय पांडेय व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बैठक कर रहे हैं। इससे पहले केस की फाइल व जजमेंट आदि जेल में भेज दिए गए थे। इसी बीच कोर्ट रूम में मौजूद स्टाफ ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर सुनवाई अब किसी गुप्त स्थान पर की जाएगी। इसके बावजूद पता नहीं लगा सका कि सुनवाई कहां हो रही है।
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शाम करीब साढ़े चार बजे अपुष्ट खबर आई कि केस की सुनवाई के लिए जज साहब तिहाड़ जेल गए थे और वहीं सुनवाई की। पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की नीति बेहद कारगर रही। किसी को पता नहीं चल पाया कि जज अजय पांडेय को किस रास्ते से तिहाड़ जेल तक ले जाया गया।