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फैसलों पर अडिग रहने वाली कुशल राजनीतिज्ञ थीं शीला, 81 की उम्र में भी आत्मविश्वास से रहती थीं लबरेज

Sun, 21 Jul 2019 08:45 AM IST
राजेश सैनी नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Sun, 21 Jul 2019 08:45 AM IST
सार

-अस्वस्थ रहने के बावजूद पार्टी हित में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेती थीं

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Sheila Dikshit a skilled politician who is in the age of 81 lived with self confidence
शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

राजनीतिक जीवन में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कभी कमजोर नहीं पड़ी। उम्र भले ही उनकी 81 के पार चली गई थी, लेकिन कुशल राजनीतिज्ञ की तरह तमाम विरोधों के बावजूद अपने निर्णयों पर कायम रहीं। निधन के दो दिन पहले तक अपने धुर विरोधियों की हर चाल को मात देती रहीं। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार मिलने के बाद दिल्ली कांग्रेस में गुटबाजी पूरे चरम पर रही।

Sheila Dikshit a skilled politician who is in the age of 81 lived with self confidence
शीला दीक्षित, पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

शीला अपने राजनीतिक कॅरियर में फैसलों को लेकर सदैव अडिग रही और पार्टी के समर्पित भी। गत लोकसभा चुनाव में पार्टी के कद्दावर नेता भी अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थे और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का लगातार दबाव बना रहे थे, लेकिन शीला दीक्षित पार्टी में बगावती तेवर को धत्ता बताते हुए अपने दम पर गठबंधन से इंकार करती रही और अकेले दम पर चुनाव लड़ीं।

Sheila Dikshit a skilled politician who is in the age of 81 lived with self confidence
शीला दीक्षित का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला

इतना ही नहीं उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों से बेहतर मत भी हासिल किए। लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद उन्होंने तमाम विरोध के बावजूद एक ही झटके में 280 ब्लॉक अध्यक्षों को हटा दिया और पर्यवेक्षक नियुक्त कर नए ब्लॉक अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया।

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Sheila Dikshit a skilled politician who is in the age of 81 lived with self confidence
केजरीवाल से मिलीं शीला दीक्षित और अन्य कांग्रेसी नेता (फाइल फोटो) - फोटो : ani

पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी व अन्य कद्दावर नेताओ के विरोध के बावजूद वह बीमारी की हालत में भी तमाम निणर्य लेती रहीं। उनके निर्णयों को आलाकमान से भी बराबर मौन स्वीकृति मिलती रही। लोकसभा चुनाव के पूर्व 2 मई को अमर उजाला के साथ साक्षात्कार में 81 साल की उम्र में भी शीला आत्म विश्वास से लबरेज दिखीं। ठीक से चल पाने में असमर्थ दीक्षित चुनावी जीत के प्रति आश्वस्त तो दिखीं ही साथ ही अस्वस्थ होने के बावजूद उनकी गर्मजोशी और खुशमिजाजी में कमी नहीं थीं।

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Sheila Dikshit a skilled politician who is in the age of 81 lived with self confidence
शीला दीक्षित से मिले मनोज तिवारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

हार स्वीकारने में संकोच नहीं किया
पंद्रह साल मुख्यमंत्री रहने के बावजूद चुनाव हारने पर बिना संकोच कुशल राजनीतिज्ञ की तरह कहा कि आम आदमी पार्टी ने कई वादे किए। मुफ्त बिजली-पानी देने के वादे ने वोटरों पर असर डाला। दूसरी चीज जो बहुत सफाई से बोलीं कि हमें सत्ता में रहते पंद्रह साल हो गए थे। शायद लोगों को लगा अब शीला को बदलो। दिल्ली की जनता को लगा होगा कि बदलाव होना चाहिए। साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा कि अमर उजाला के माध्यम से जनता को यहीं कहूंगी कि जिस राजनीतिक पार्टी ने भी दिल्ली का विकास किया, तुलना करके उसी पार्टी को वोट करें। 

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