PHOTOS : बर्गर बेचने वाली दिहाड़ी मजदूर की बेटी बनी सरपंच
सोमवार सुबह एक लड़की गली में तीन सहेलियों के साथ मटका सिर पर उठाए जा रही है। संवाददाता इस गांव में पहुंचा और इन्हीं लड़कियों से पूछा कि सरपंच रेखा का घर कहां है, तो बांयी ओर खड़ी लड़की ने जवाब दिया...जी मैं ही हूं। बेहद साधारण दिख रही इस युवती को देखकर सहसा कोई नहीं कह सकता कि आज इसके हाथ में गांव की चौधर है। पिता बंसीलाल दिहाड़ी मजदूर हैं।
(अमित रूखाया/अमर उजाला, गुड़गांव)
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घर पहुंचने पर पता चला कि करीब 15 दिन पहले तक यह युवती चंडीगढ़ में बर्गर किंग रेस्टोरेंट पर काम करती थी और आज इस गांव की सरपंच बन गई। बात लंबी चली तो लगा किस्मत ने रेखा का खूब साथ दिया। पहली बार सितंबर में चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद रेखा ने पर्चा भरा, लेकिन उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब उसका नामांकन इस वजह से रद्द कर दिया गया की उम्र 21 साल पूरी नहीं हुई थी।
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तब वह 20 साल आठ महीने की हुई थी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक योग्यता लागू करने को लेकर पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया। दिसंबर में जब सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षिक योग्यता सहित सभी शर्तों को लागू करते हुए चुनाव को हरी झंडी तब तक रेखा 21 बरस की हो चुकी थी। सरपंच पद के लिए आवश्यक आयु योग्यता पूरी होती ही चंडीगढ़ में बर्गर किंग रेस्टोरेंट पर काम करने वाली रेखा ने गांव आकर एससी आरक्षित सीट पर सरपंच के लिए नामांकन भर दिया।
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रेखा ने 1001 वोटों में से 610 मत हासिल किए। जबकि उसकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्मल को 394 वोट मिले। वहीं दूसरी ओर होडल खंड के पंच सरपंचों के चुनाव में सामान्य वर्ग की आठ, ओबीसी की दो, पिछड़ा व अनुसूचित वर्ग की दो-दो महिलाओं ने सरपंच पद का चुनाव जीता है।
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जबकि पुरुषों में दस सामान्य, चार अनुसूचित, एक पिछड़ा वर्ग तथा ओबीसी वर्ग के तीन प्रत्याशियों ने सरंपच पद पर अपनी जीत दर्ज कराई है।