किंग शाहरुख खान की जीवन की पहली कमाई और पंकज उधास के बीच ऐसा है कनेक्शन...
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हिंदुस्तानी ग़ज़ल गायिकी में दो चमकदार सितारे हुए। जगजीत सिंह और पंकज उधास। दोनों ने ही ग़ज़लों गायिकी की दुनिया को एक नया मुहावरा और तरन्नुम दिया। जगजीत सिंह ने ग़ज़लों को रवायती अंदाज़ से बाहर निकाला तो पंकज उधास ने उसे हर ख़ासो-आम में बे-शुमार शोहरत दिलाई। अपनी मधुर आवाज से ग़ज़ल को लोकप्रिय संगीत के दायरे में लाने का श्रेय पंकज उधास को भी ख़ूब जाता है। गुजरात के राजकोट में 17 मई 1951 को जन्में पंकज उधास की कुछ ग़ज़लें तो ऐसी हैं जिन्हें सुनने के साथ ही मखमली आवाज़ का अक्स जेहन में उभरता है। इनमें चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है, एक तरह उसका घर एक तरफ मयकदा, निकलो न बेनकाब जमाना खराब है, दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है हम भी पागल हो जाएंगे कुछ ऐसा लगता है आदि शामिल हैं।