पूर्व सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। फिलहाल, सज्जन कुमार के निधन के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।
सज्जन कुमार एक अनुभवी राजनेता थे और उन्होंने लोकसभा में सांसद के रूप में कार्य किया। वे 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी पाए गए थे। हालांकि, हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो मामलों में उन्हें बरी कर दिया था।
सूत्रों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उनका निधन हो गया, लेकिन इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सज्जन कुमार के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। उनके निधन के कारणों का पता चलने के बाद ही आगे की जानकारी सामने आ पाएगी।
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Sajjan Kumar
- फोटो : ANI
पढ़ें अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी
नवंबर 1984 के दंगों के एक और मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा मिली थी। दिल्ली की राजनीति में एक समय सज्जन कुमार की तूती बोलती थी और वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के नवरत्नों में गिने जाते थे। दिल्ली दंगों में नाम आने के बाद से ही उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई और कई बार लोकसभा टिकट पर उनका नाम कटा और सजा के बाद वे राजनीति के अर्श से फर्श पर आ गए।
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो
- फोटो : ani
डेयरी का काम किया, पहले पार्षद बने फिर लोकसभा पहुंचे
सज्जन कुमार अपने आरंभिक दिनों में डेयरी का काम करते थे। उन पर किस्मत ऐसी मेहरबान हुई कि वे पहले पार्षद व फिर लोकसभा तक पंहुचने में कामयाब रहे। सजंय गांधी की नजदीकी के चलते उनकी गिनती कांग्रेस के दिग्गजों में होने लगी।
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
पार्षद बनने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा
सज्जन कुमार शुरू से ही दबंग रहे हैं और इसी के चलते उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता हीरा सिंह से हुई। उन्होंने ही दिल्ली के वेताज बादशाह कहे जाने वाले एचकेएल भगत के जरिए सज्जन को निगम पार्षद का टिकट दिलाया और सज्जन जीत भी गए। इसके बाद सज्जन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी दौरान संजय गांधी की नजर उन पर पड़ी।
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सज्जन कुमार की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री को दी मात
वर्ष 1977 में कांग्रेस की हालत खराब थी और कांग्रेस ने सज्जन कुमार को बाहरी दिल्ली से प्रत्याशी बना दिया। सज्जन ने अपने प्रतिद्वंदी और दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रहे ब्रह्म प्रकाश को हरा दिया। इसी के साथ सज्जन कुमार की राजनीति में अहमियत बढ़ गई। इसके बाद दिल्ली दंगों के चलते कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया। हालांकि वर्ष 1991 के चुनावों में वे टिकट पाने में कामयाब रहे और जीत भी गए। उन्होंने भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा को हराया।