पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज वकील राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया। कुछ दिनों से बीमार चल रहे जेठमलानी ने अपने आधिकारिक आवास पर सुबह करीब 7:45 बजे अंतिम सांस ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विधिमंत्री रहे जेठमलानी को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता था। कानून की बारीकियों के बेताज बादशाह राम जेठमलानी ने अपने वकालत के करियर में देश के तकरीबन तमाम बड़े हाईप्रोफाइल माने गए मुकदमों से वकील के तौर पर वास्ता रखा। उन्हें इसके लिए मीडिया की सुर्खियां भी मिलीं। उनकी ख्याति देश के सबसे महंगे वकीलों में की जाती रही। आगे जानिए कैसे उन्होंने तय किया फर्श से अर्श तक का सफर...
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ram jethmalani
- फोटो : पीटीआई
कहा जाता है कि वह एक मुकदमा लड़ने के लिए 25 लाख रुपये की फीस लेते थे। लेकिन खुद जेठमलानी की मानी जाए तो इस महंगी फीस तक का सफर तय करने के लिए जब वह बंटवारे के समय पाकिस्तान के कराची से अपना सबकुछ छोड़कर भारत आए थे तो उनकी जेब में महज एक पैसे का सिक्का ही मौजूद था।
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राम जेठमलानी ने अपने करियर का पहला केस अपने लिए ही लड़ा था। महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले जेठमलानी को वकील बनने के लिए न्यूनतम 21 साल की उम्र तय होने के कारण वकालत की इजाजत नहीं मिली। जेठमलानी ने इस नियम को सिंध कोर्ट में चुनौती दी और जीतकर 18 साल की उम्र में वकालत का करियर शुरू किया।
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बंटवारे से पहले सिंध प्रांत में वकालत करने वाले जेठमलानी कराची में देश विभाजन के कारण दंगे भड़कने पर फरवरी, 1948 में भारत आए। उस समय उनकी जेब में महज एक पैसे का सिक्का था, जो शरणार्थी शिविरों में रहने के दौरान खर्च हो गया। बाद में उन्होंने आजाद भारत में अपना वकालत का करियर बांबे रिफ्यूजी एक्ट के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में मुकदमा लड़कर शुरू किया था।
इसके बाद तमाम ऐसे चर्चित मामले रहे, जहां आरोपी पक्ष की तरफ से उतरने के बावजूद जेठमलानी ने अपने कानूनी दांव पेचों से जमकर सुर्खियां बटोरीं। वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन भी चार बार रहे। बैडमिंटन खेलने के शौकीन जेठमलानी के पास एक से एक महंगी कारों और कीमती घड़ियों का भी संग्रह था। राम जेठमलानी के पुत्र महेश जेठमलानी भी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में गिने जाते हैं।