दक्षिण हरियाणा स्थित गुरुग्राम के आईटीसी ग्रैंड भारत होटल में राजस्थान कांग्रेस के बागी विधायक मनोरंजन नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा वे एकत्रित होकर न बात कर पा रहे हैं और न ही खाना पा रहे। जानिए इसकी क्या है वजह...
राजस्थान के कांग्रेसी विधायक गुरुग्राम के होटल नहीं कर पा रहे मनोरंजन, ऐसी हैं बंदिशें
होटल प्रबंधन ने कोरोना महामारी से बचाव के उपायों के मद्देनजर कई सुविधाओं में कटौती कर रखी है और कई नियमों का कड़ाई से पालन कर रहा है। होटल प्रबंधन ने कोरोना महामारी के मद्देनजर एक कमरे में एक ही विधायक को ठहराया है। इसके अलावा उन्हें ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर रेंस्टोंरेंट के बजाए कमरे में ही दिया जा रहा है।
वहीं उन्हें खेलने के लिए ताश आदि भी नहीं दिए गए हैं। विधायक गर्मी दूर करने के लिए स्वीमिंग पुल में भी नहा नहीं पा रहे हैं और होटल के जिम में कसरत करने का भी अवसर नहीं मिल रहा, क्योंकि जिला प्रशासन ने स्वीमिंग पुल एवं जिम खोलने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
होटल प्रबंधन विधायकों को लॉबी में भी साथ बैठने की इजाजत नहीं दे रहा। इस कारण विधायकों ने अधिकतर समय अपने कमरे में टीवी देखकर बिताया। वे टीवी पर राज्य के वर्तमान राजनीतिक माहौल से जुड़ी खबरें देखने में रूचि ले रहे थे। उन्होंने अपने राज्य के न्यूज चैनलों पर रखी। वे उनके माध्यम से दिल्ली व जयपुर में चल रही गतिविधियों की पल-पल की जानकारी लेने में लगे रहे। हांलाकि कुछ विधायकों ने सुबह के समय गोल्फ में हाथ आजमाए, जबकि कई विधायकों ने मोबाइल फोन में गेम खेले।
गहलोत सरकार गिराए बिना नहीं बनेगी सचिन पायलट की बात
राजस्थान में कांग्रेस में अंतर्कलह के चरम पर पहुंचने के बावजूद भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। हालांकि बगावती तेवर अपनाने वाले उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिये भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा नेतृत्व की रणनीति पायलट द्वारा गहलोत सरकार को गिराने के बाद ही इस मामले में आगे भूमिका निभाने की है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व संख्याबल के मामले में आश्वस्त होना चाहता है। अब तक अधिकतम 20 विधायकों के पायलट के साथ होने की बात आ रही है। जबकि हकीकत यह है कि खुलकर महज 12 विधायक ही पायलट के साथ हैं। उस पर यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी गहलोत सरकार गिराने और जरूरी पड़ने पर भाजपा में शामिल होने के लिए राजी होंगे या नहीं? गहलोत सरकार को 12 निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।