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राघव चड्ढा ने राजनाथ को भेजा 2.5 रुपए का ड्राफ्ट, कहा-...ताकि उतार सकूं मोदी सरकार का अहसान

Fri, 20 Apr 2018 10:32 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Apr 2018 10:32 AM IST
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raghav chadha sends 2 rupee 50 paise draft to rajnath singh says returned my salary as advisor
raghav chadha - फोटो : अमर उजाला

केजरीवाल सरकार के 9 सलाहकारों को केंद्र सरकार द्वारा हटाए जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी लगातार गृहमंत्री पर निशाना साधे हुए है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए वित्त सलाहकार के पद से हटाए गए राघव चड्ढा ने बड़े ही अनोखे ढंग से केंद्र सरकार पर वार किया है।

raghav chadha sends 2 rupee 50 paise draft to rajnath singh says returned my salary as advisor
raghav chadha

राघव ने विरोध में अपना ढाई रुपए का पारिश्रमिक लौटा दिया है। बुधवार को राघव ने गृहमंत्रालय के नाम पर ढाई रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा है।

raghav chadha sends 2 rupee 50 paise draft to rajnath singh says returned my salary as advisor
raghav chadha

सिर्फ डिमांड ड्राफ्ट नहीं राघव ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक खत भी लिखा है। उन्होंने लिखा है कि सलाहकार के जिस पद से उन्हें हटाया गया है उस पर उन्हें सिर्फ 2.5 रुपए मिलते थे। राघव ने कहा कि वह चार्टर्ड अकाउंट के तौर पर काम करता हूं और मैंने 75 दिन के लिए सरकार के लिए काम किया था।

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raghav chadha sends 2 rupee 50 paise draft to rajnath singh says returned my salary as advisor
raghav chadha - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने आगे कहा कि 75 दिनों में मैंने बजट बनाने में सरकार की सहायता की और इस काम के लिए सरकार की तरफ से ढाई रुपए मेहनाता मिला। वो आगे बोले,  'मैं इस ढाई रुपए की राशि का डिमांड ड्राफ्ट अपने खत के साथ गृह मंत्रालय को भेज रहा हूं ताकि मैं मोदी सरकार का ये अहसान उतार सकूं।'

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raghav chadha sends 2 rupee 50 paise draft to rajnath singh says returned my salary as advisor
raghav chadha - फोटो : अमर उजाला

राघव ने अपने हटाए जाने के साथ ही बीजेपी में साधू-बाबाओं की एंट्री पर भी चुटकी ली। मध्य प्रदेश में एक साधु-बाबा को मंत्री के तौर पर नियुक्त करना और सभी को भारी रकम और घर, गाड़ी, बंगला देना बीजेपी की नज़र में सही है, लेकिन उनकी नजर में शिक्षाविद आतिशी मर्लीना जैसे लोगों को काम करने का कोई हक नहीं है। जो सिर्फ 1 रुपए प्रति माह की तनख्वाह पर दिन-रात दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे।

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