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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   DTC bus driver convicted in hit-and-run case; arguments on sentencing today.

Delhi NCR News: डीटीसी बस ड्राइवर हिट एंड रन मामले में दोषी करार, सजा पर बहस आज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 06:21 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व डीटीसी बस ड्राइवर को 2021 में एक व्यक्ति की मौत का कारण बनी लापरवाह और उतावली ड्राइविंग के मामले में दोषी करार दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ट्विंकल चावला ने इंद्रपुरी पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज मामले में आरोपी करण सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (उतावली ड्राइविंग) और 304ए (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत दोषी ठहराया। अदालत सोमवार को सजा पर बहस की सुनवाई करेगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करण सिंह इंद्रपुरी के एनएएससी कॉम्प्लेक्स के पास डीपीएस मार्ग पर डीटीसी बस चला रहे थे, जब उन्होंने पीछे से एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी। अमित सिंह अपनी बाइक पर सवार थे और उनके भाई पीछे बैठे थे। टक्कर के बाद अमित सिंह गिर गए और बस के पिछले टायर के नीचे कुचल गए। अदालत ने कहा कि टक्कर इतनी भीषण थी कि पीड़ित के खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया था तथा छाती और गर्दन पर टायर के निशान मौजूद थे। पीड़ित के भाई की गवाही और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 17 अगस्त के आदेश में ड्राइवर के इस बचाव को खारिज कर दिया कि उनकी बस दुर्घटना में शामिल नहीं थी। मैकेनिकल निरीक्षण में बस के पिछले बाहरी टायर की बाहरी सतह पर सूखे खून के निशान तथा अंदर की मेहराब वाली सतह पर सूखा मांस और दिमाग का पदार्थ पाया गया था। अदालत ने नोट किया कि दुर्घटना सुबह के व्यस्त समय में हुई थी और बस अपनी निर्धारित लेन में नहीं चल रही थी। अदालत ने कहा, “किसी भी स्थिति में ऐसा कोई सटीक कैलिब्रेटेड उपकरण नहीं है जो उतावली या लापरवाही को अंकगणितीय रूप से साबित कर सके। हर समझदार ड्राइवर जानता है कि आगे छोटे वाहन को देखकर भी अगर तेज गति से गाड़ी चलाते हुए गति नहीं घटाई जाए तो यह कृत्य पूर्वानुमानित खतरों से भरा होता है और परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि डीटीसी बस जैसे बड़े वाहन के पेशेवर ड्राइवर पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जिम्मेदारी होती है ताकि सड़क पर अन्य लोगों और अपने यात्रियों की सुरक्षा खतरे में न पड़े। मैकेनिकल रिपोर्ट के अनुसार ब्रेक में कोई यांत्रिक खराबी नहीं थी, फिर भी आरोपी ने समय पर ब्रेक नहीं लगाए।



अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा, आरोपी ने गति कम करने की जहमत नहीं उठाई और समय पर ब्रेक लगाने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप टक्कर हुई और फिर पीड़ित को कुचल दिया गया।
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