सुप्रीम कोर्ट में राफेल मुद्दे पर दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं। केंद्र सरकार की इसी दलील के बाद से राजनीतिक गलियारों में भूचाल आया हुआ है। एक ओर इसे लेकर जहां राहुल गांधी प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय पर केस चाहते हैं , वहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कवि और नेता कुमार विश्वास ने भी सरकार पर हमला बोला है। सभी सवाल कर रहैं कि आखिर रक्षा मंत्रालय से इतने अहम सबूत गायब कैसे हुए। आगे पढ़ें राफेल की अहम फाइलें चोरी होने पर किसने क्या कहा और कोर्ट में क्या बहस हुई...
राफेल फाइल गायब होने पर केजरीवाल ने पीएम मोदी पर बोला हमला, विश्वास ने कहा- जांची-परखी व्यापम आदत है
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कोर्ट ने सरकार की दलील पर उन्हें गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इस बीच सरकार पर सियासी वार तेज हो गए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपने एक ट्वीट में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'इसका मतलब मोदी जी ने चोरी की है। अब सारे कागज गायब कर दिए। अगर चोरी नहीं की होती तो कागज गायब करने की क्या जरूरत थी? ऐसा प्रधान मंत्री देश के लिए बेहद खतरनाक है जो सेना से संबंधित कागज ही गायब करवा दे।'
गौरतलब है कि केंद्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बुधवार को कोर्ट में कहा, रक्षा खरीद को लेकर कानून बनाया जाना चाहिए। यह देश के अस्तित्व से जुड़ा मसला है। अदालत को ऐसे मामले में खुद पर संयम रखना चाहिए। कोर्ट के किसी तरह के बयान से सरकार अस्थिर हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के 14 दिसंबर के फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस केएम जोसफ की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा, पहले के रक्षा सौदों में सरकार संसद में कीमत व शर्तों का खुलासा करती रही है। सीएजी के इतिहास में पहली बार संपादित या संशोधित रिपोर्ट पेश की गई। अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी।
कोर्ट रूम लाइव
अटॉर्नी जनरल : पहला राफेल सितंबर तक आना है। 32 पायलट ट्रेनिंग के लिए फ्रांस गए हैं। हम देश बचाने के लिए इस हद तक प्रयास कर रहे हैं। याचिकाकर्ता नहीं चाहते, सौदा नतीजे तक पहुंचे।
सीजेआई : हम नहीं कह रहे कि इस मामले में भ्रष्टाचार हुआ लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो क्या ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की आड़ ली जा सकती है।
अटॉर्नी जनरल: रक्षा सौदे की फाइल नोटिंग न्यायिक परीक्षण के दायरे में नहीं आ सकती क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला है। युद्ध हुआ तो क्या हमें कोर्ट में आना चाहिए? हमने देखा, एफ-16 विमान भारत में घुसा और बम गिराए।
सुप्रीम कोर्ट: बोफोर्स मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोप थे। आप क्या कहना चाहते हैं कि अदालत इन साक्ष्यों को देखे ही नहीं? यहां खुली व्यवस्था है।
अटॉनी जनरल: हां, हमारे यहां बेहद खुला सिस्टम है। यह एकमात्र ऐसा देश है जहां कोर्ट रक्षा सौदे की जांच कर रही है। किसी और देश में ऐसा नहीं।
अटॉर्नी जनरल : दस्तावेज चोरी किए गए और गैरकानूनी तरीके से हासिल किए तो क्या कोर्ट इस पर विचार न करे?