पिछले दिनों सहारनपुर में हुई जातिगत हिंसा के विरोध में भीम आर्मी के बैनर तेल रविवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ। बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। खास बात यह कि प्रर्दशन में भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने आजाद के ऊपर यूपी सरकार की तरफ दर्ज मुकदमा हटाने और सहरानपुर हिंसा के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की मांग भी की गयी। भीम आर्मी के प्रदर्शन को दूसरे दलित संगठनों ने भी समर्थन किया।
प्रदर्शन में पहुंचे चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया को बताया कि सहारनपुर में दलितों पर अत्याचार किया गया उनके घर जलाये गये। उन्होंने आरोप लगाया कि लूटपाट के दौरान पुलिस मूक दर्शक बनी रही। मामले को तूल देने में पुलिस और प्रशासन दोनों की मिलीभगत है। भीम सेना पर दर्ज मुकदमों के बारे में चंद्रशेखर का कहना था कि सारा मामला झूठा है। समुदाय विशेष के लोगों को बचाने के लिए यह सब किया गया है। चंद्रशेखर ने दावा किया कि अगर भीम आर्मी दोषी है तो पुलिस को सबूत लोने चाहिये।
दूसरी तरफ प्रर्दशनकारियों ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार को दलितों की सुध नहीं है। भाषण देने के अलावा जमीनी स्तर पर दोनों ने कोई बदलाव नहीं किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भाजपा सरकारों का असली दलित विरोधी चेहरा सामने आ गया है।
दरअसल, जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के लिये भीम आर्मी ने सोशल मीडिया का सहारा लिया था। फेसबुक व ट्वीटर पर ग्रुप बनाकर लोगों से जंतर मंतर पर जुटने की अपील की गयी थी। इसमें दूसरे प्रदेशों के युवाओं के वीडियो संदेश शेयर किये गये थे। वीडियो में देश भर में दलितों पर हो रहे अत्याचार का दावा करते हुये जंतर मंतर पर जुटकर इंसाफ की मांग करने को कहा गया था। इस अपील का लोगों में असर भी रहा। सुबह से जंतर मंतर पर लोग जुटने लगे थे। इस बीच कुछ लोगों से प्रदर्शनकारियों की कहासुनी हुयी। लेकिन पुलिस ने हालात को बिगडने नहीं दिया।
हालांकि, आयोजकों ने प्रदर्शन के लिये पुलिस से पहले इजाजत नहीं ली थी। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने तक उन पर बल प्रयोग नहीं किया जायेगा। लेकिन भारी भीड़ को देखते हुये पुलिस ने सुरक्षा के भी चाक चौबंद इंतजाम किये किये थे। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ जंतर मंतर पर बैरीकेट भी लगाया गया था।