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जेएनयू हिंसा: पुलिस के पास CCTV फुटेज और व्हाट्सएप ग्रुप चैट, पर नहीं हुई नकाबपोशों की गिरफ्तारी 

Thu, 09 Jan 2020 09:20 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Thu, 09 Jan 2020 09:20 AM IST
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police having cctv footage and WhatsApp group chat but no No arrests in jnu violence
jnu violence - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू कैंपस में हिंसा करने वाले नकाबपोश उपद्रवियों का दिल्ली पुलिस चार दिन बाद भी सुराग नहीं लगा सकी है। हिंसा के बाद कैंपस में साजिश का एक व्हाट्सएप ग्रुप चैट वायरल हुआ था। पुलिस ने इसे खंगालने की जहमत अब तक नहीं उठाई है। हालांकि पुलिस का दावा था कि उसके पास सीसीटीवी फुटेज भी है। उधर, छात्रों का आरोप है कि हिंसा के वक़्त पीसीआर को सैकड़ों कॉल की गईं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। ऐसे ही कई अन्य सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहे हैं।

 
police having cctv footage and WhatsApp group chat but no No arrests in jnu violence
jnu violence - फोटो : Social Media
पुलिस ने अब तक की जांच में करीब 15 गार्डों के बयान दर्ज किए हैं। हिंसा वाले दिन जो सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे, उनमें से ज्यादातर छुट्टी पर हैं। इस कारण उनके भी बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं। उधर, सर्वर बंद होने की वजह से सीसीटीवी काम नहीं कर रहे थे। पुलिस अब तक छात्रों का डाटा भी नहीं जुटा सकी है। उसका कहना है कि छात्रों के मोबाइल नंबर एकत्र किए जा रहे हैं।
 
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आईशी घोष के खिलाफ एफआईआर दर्ज - फोटो : अमर उजाला
वैसे दिल्ली पुलिस ने अब तक की जांच से गृह मंत्रालय को अवगत कराया है। उसने कहा है कि अहम सुराग हाथ लगे हैं। इस मामले में जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। दूसरी ओर, एसआईटी सूत्रों के अनुसार, पुलिस पुख्ता सबूत एकत्र करने के बाद ही आरोपियों को गिरफ्तार करेगी। एसआईटी जेएनयू के सभी छात्रों के मोबाइल नंबर एकत्र कर रही है। इनसे जेएनयू में आए बाहरी युवकों के बारे में पता लगेगा। एसआईटी ने बुधवार को जेएनयू के पांच छात्रों के बयान दर्ज किए।
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JNU - फोटो : ANI
ये भी तो हैं सवाल

- छात्रों का सवाल है कि पुलिस कैंपस में दाखिल नहीं हो सकती थी तो उसने बाहर भागते वक्त नकाबपोशों को क्यों नहीं दबोचा?
- अगर पुलिस के पास फुटेज है तो वह घटना के चार दिन बाद भी एक भी नकाबपोश का सुराग कैसे नहीं लगा सकी? पुलिस के पास पीड़ित छात्रों के मोबाइल से बनाए गए उपद्रवियों के वीडियो भी हैं।
- कैंपस से चंद कदम दूर स्थित वसंत कुंज थाना पुलिस और हर वक्त सड़कों पर पेट्रोलिंग का दावा करने वाली पुलिस के बीच से सभी नकाबपोश आसानी से कैसे भाग निकले?
- घटना के कुछ देर बाद ही नकाबपोश उपद्रवियों की एक कथित वायरल व्हाट्स एप चैट पुलिस तक पहुंची थी। इसमें हिंसा को लेकर कई लोगों की बातचीत है। इतना सब होने पर भी पुलिस ने इस ग्रुप में मिले मोबाइल नंबरों का ब्यौरा तक नहीं जुटाया।
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जेएनयू हिंसा के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू हिंसा में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पुलिस ने दावा किया था कि उसके पास सीसीटीवी फुटेज भी है। जबकि जेएनयू के छात्रों का आरोप है कि कैंपस में हिंसा के वक़्त पीसीआर को सैकड़ो कॉल की गई। फिर भी पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। ऐसे ही कई अन्य सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहे रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को कुछ नकाबपोश उपद्रवियों ने छात्रों की जमकर धुनाई की थी। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में घंटों जारी बवाल के बाद भी पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की गई।
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