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देश को डिजिटल पेमेंट की ओर ले जा रही सरकार, लेकिन अपने घर का कब करेगी खयाल

Thu, 24 Nov 2016 04:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Nov 2016 04:31 PM IST
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pm want country to go with digital payment but he is not paying attention to centre run canteens
भाजपा मुख्यालय की कैंटीन - फोटो : मेल टुडे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरबीआई या बीजेपी के मंत्री और नेता नोटबंदी के बाद से बाद से ही लोगों से यह अपील कर रहे हैं कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दीजिए, नकद का इस्तेमाल कम कीजिए। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे देश को डिजिटल पेमेंट की बात कहने वाले केंद्र सरकार खुद अपने घर में ही इसे बढ़ावा नहीं दे पा रही। (स्टोरी व फोटो साभारः मेल टुडे)

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note - फोटो : सोशल मीड‌िया

जो सरकार देश को कैशलेस इकोनॉमी बनाना चाहती है उसके खुद के पार्टी मुख्यालय की कैंटीन में खाना खाने के बाद नकद में पेमेंट करना पड़ता है। जी हां अगर आप भाजपा के पार्टी मुख्यालय के कैंटीन में जाएंगे तो वहां आज भी कोई कार्ड स्वैपिंग मशीन नहीं है। यहां खाना खाने वालों को नकद में ही भुगतान देना होता है।

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रेल भवन कैंटीन - फोटो : मेल टुडे

बता दें कि यह हाल केवल भाजपा के हेडक्वार्टर का नहीं है बल्कि देश की संसद की जो कैंटीन है वहां भी भुगतान के लिए सिर्फ हार्ड कैश का ही इस्तेमाल होता है, इसके अलावा और कोई सुव‌िधा उपलब्ध नहीं है। यहीं नहीं शास्त्री भवन स्थित अन्य मंत्रालयों के कैंटीन और रेल भवन में भी सिर्फ नकद लेन-देन ही होता है। अंग्रेजी अखबार मेल टुडे की एक खबर के अनुसार जब बीजेपी मुख्यालय की कैंटीन में पेमेंट की बात आई तो उन्होंने कहा कि, 'माफ कीजिए हम कार्ड या पेटीएम नहीं लेते, कृपया आप नए नोटों से भुगतान करें।'

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पेटीएम से लेन देन कर रहे छोटे दुकानदार - फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला

दिलचस्प तो ये है कि इन हाईप्रोफाइल क्षेत्रों के आसपास कुछ चायवालों ने भी पेटीएम जैसे ई-वॉलेट में भुगतान लेना शुरु ‌कर दिया है लेकिन खुद सरकार के अधीन आने वाली इन जगहों पर अभी तक डिजिटल पेमेंट की सुव‌िधा नहीं है। नोटबंदी के 15 दिन बाद भी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था ना होना सरकार की प्राथमिकता दिखाती है।

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कैश भुगतान - फोटो : मेल टुडे

आपको बता दें कि सरकार की इस घोषणा के बावजदू कि सरकारी दवाई की दुकानें पुरानी नोट लेंगी, लेकिन केंद्र सरकार की 'जन औषधि' नामक दवा की दुकान पुराने नोट या डिजिटल पेमेंट लेने से इंकार कर रही है। स्टोर के मैनेजर का साफ कहना है कि, 'हम नकदी में ही लेन-देन करते हैं और वैसे ही करेंगे। हालांकि हमें पुराने नोट लेने को कहा गया है लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।'

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