दिल्ली के ओखला इलाके में ईद के दिन पांच लोगों की आग में जलकर मौत हो गई। सोमवार रात करीब 9:56 बजे ओखला की टाटा स्टील झुग्गी के एक चाय की दुकान पर सिलेंडर फट गया। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हो गए। पुलिस और फायर टेंडर के मुताबिक, झुग्गी और उसके अंदर रखे सामान को बचाने के चक्कर में झुग्गी के गेट को बंद करना ही पांच लोगों की मौत का कारण बना गया। अगर झुग्गी का गेट खुला रहता, तो शायद लोगों की जान बच जाती।
बुजुर्ग मुन्नीलाल ने बताया कि घटना से कुछ समय पहले झुग्गी के अंदर पूजा हो रही थी। ज्यादातर लोग झुग्गी के अंदर थे। बाहर नाच-गाना हो रहा था। झुग्गी के मेन गेट पर चूल्हा जल रहा था और रोटी बन रही थी। सब्जी बनाने के लिए बड़े सिलेंडर को जलाने का प्रयास किया गया।
बड़े सिलेंडर को जलाने के प्रयास में रेगुलेटर से गैस लीक हो गई। गैस के फैलने के साथ ही आग भी फैलती चली गई। आग झुग्गी के अंदर न आ जाए ये सोचकर झुग्गी के अंदर मौजूद लोगों ने झुग्गी के गेट को अंदर से बंद कर लिया। मगर गेट ऐसा था कि उसके मौजूद छेदों से गैस व आग झुग्गी के अंदर चली गई।
आग झुग्गी के मेन गेट पर लगी थी, इस कारण अंदर के लोग अंदर ही फंसे रह गए। झुगी के अंदर गैस के दो छोटे सिलेंडर रखे हुए थे। बताया जा रहा था कि एक सिलेंडर जल रहा था। इससे आग और फैल गई। इससे झुग्गी के अंदर मौजूद लोग आग की चपेट में आ गए। झुग्गी के छत भी लककियों की बनी हुई और उसके ऊपर प्लास्टिक की त्रिपाल पड़ी हुई थी। इससे आग और फैल गई। आग से चारों तरफ चीख पुकार व भगदड़ मच गई।
झुग्गी के बाहर बैठे लोग भी आग की चपेट में आ गए। लोगों ने दूर भागकर अपनी जान बचाई। आग में झुलसे जितेन्द्र ने बताया कि वह शादी में शरीक होने मऊ, यूपी से दो दिन पहले आया था। आग लगी तो वह बचाने झुगी के अंदर जाने लगा उसी दौरान वह आग की चपेट में आ गया। जितेन्द्र का कहना है कि अगर झुग्गी का गेट बंद नहीं किया जाता तो जान-मान का ज्यादा नुकसान नहीं होता।