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ऑनलाइन: जंतर-मंतर से गेमिंग की दुनिया तक पहुंचा विरोध-प्रदर्शन, ‘भाग नेहा भाग’ जैसे खेल में पुलिस पर भी कटाक्ष

Sun, 18 Oct 2026 03:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 18 Oct 2026 03:22 AM IST
सार

 ‘जंतर-मंतर चलो’, ‘जंतर-मंतर से जेल’ और ‘भाग नेहा भाग’ जैसे मुफ्त ऑनलाइन गेम सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहे हैं।

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Protests spread from Jantar Mantar to the world of gaming
demo pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की जगह भले ही सीमित कर दी गई हो, लेकिन जेन-जी ने इसे गेमिंग की दुनिया में पहुंचा दिया है। ‘जंतर-मंतर चलो’, ‘जंतर-मंतर से जेल’ और ‘भाग नेहा भाग’ जैसे मुफ्त ऑनलाइन गेम सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहे हैं। इन खेलों में दिल्ली की सड़कों पर हुए विरोध-प्रदर्शनों, पुलिस की कार्रवाई, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी परिस्थितियों को व्यंग्यात्मक अंदाज में पेश किया गया है।

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इन गेम्स में खिलाड़ियों को भीड़ जुटाने, पुलिस के अवरोधों से निकलने, आंसू गैस और पानी की बौछारों से बचने तथा हिरासत से बचकर आगे बढ़ने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कुछ खेलों में पुलिस की भूमिका निभाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का विकल्प भी मिलता है। इस तरह हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को युवाओं ने डिजिटल मनोरंजन और डार्क ह्यूमर का रूप दे दिया है।
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आईआईटी से जुड़े युवा ने बनाया ‘जंतर-मंतर चलो’
दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से प्रेरित होकर 27 वर्षीय आईआईटी प्रोफेशनल सूरज कुशवाहा ने ‘जंतर-मंतर चलो’ नाम का 3डी वीडियो गेम तैयार किया है। इसमें दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी, दोनों में से किसी एक की भूमिका चुनी जा सकती है। गेम शुरू होते ही जंतर-मंतर और उसके आसपास का डिजिटल दृश्य सामने आता है। इसमें पुलिसकर्मी, हिरासत में लेने के स्थान, मीडिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियां दिखाई गई हैं।
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यदि खिलाड़ी प्रदर्शनकारी बनता है, तो उसे भीड़ जुटाकर बैरिकेड पार करने और पुलिस की कार्रवाई से बचते हुए जंतर-मंतर तक पहुंचना होता है। वहीं, पुलिसकर्मी की भूमिका में आंदोलनकारियों को रोकना, आंसू गैस का इस्तेमाल करना और उन्हें हिरासत में लेकर बस तक पहुंचाना चुनौती है। प्रदर्शनकारियों की प्रगति और रास्ते में आने वाली बाधाओं को खेल के अंकों और चुनौतियों से जोड़ा गया है।

‘डार्क ह्यूमर’ से निकला गेम का विचार
सूरज के मुताबिक, हाल के प्रदर्शनों की खबरें देखने के बाद उनके मन में इस गेम का विचार आया। उन्होंने देखा कि कई लोग जंतर-मंतर पहुंचने के लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे थे। इसी स्थिति को उन्होंने व्यंग्यात्मक गेम में बदलने का फैसला किया। उनके अनुसार, यह उनके लिए डार्क ह्यूमर का एक रूप है। सूरज ने कॉलेज में गेम डिजाइन की पढ़ाई की थी। गेम तैयार करने के दौरान उन्होंने कोडिंग के कुछ हिस्सों के लिए एआई टूल्स और आर्ट डिजाइन के लिए दूसरे डिजिटल टूल्स की मदद ली। हालांकि, गेमप्ले की मूल अवधारणा और डिजाइन उनका अपना है। उन्होंने इसके कॉन्सेप्ट को ‘स्लिदर’ जैसे गेम से प्रेरित बताया है। सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद यह गेम लोगों का ध्यान खींचने लगा। इसे इसकी आधिकारिक वेबसाइट जंतरमंतरडॉटकॉम पर ब्राउजर के जरिए खेला जा सकता है।

‘जंतर-मंतर से जेल’ में लोकतंत्र के सिक्के
इसी तरह ‘जंतर-मंतर से जेल’ भी विरोध-प्रदर्शनों की परिस्थितियों पर आधारित ऑनलाइन गेम है। इसमें खिलाड़ी सीजेपी के सदस्यों अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की भूमिका निभाते हैं। उन्हें पुलिसकर्मियों और गिरती जेल की सलाखों से बचते हुए आगे बढ़ना होता है। रास्ते में ‘जवाबदेही’ और ‘लोकतंत्र’ लिखे सिक्के इकट्ठा करना भी खेल का हिस्सा है। इन गेम्स में गन्ने का रस पीने और गोलगप्पे खाने से स्टैमिना बढ़ाने जैसे हास्यपूर्ण तत्व भी जोड़े गए हैं। कुछ दृश्यों में गमछे की मदद से सीसीटीवी कैमरों से बचने जैसी स्थितियां दिखाई गई हैं। ‘भाग नेहा भाग’ भी इसी डिजिटल प्रवृत्ति का हिस्सा है, जो आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के जंतर-मंतर पहुंचने के प्रयासों से प्रेरित बताया गया है।


विरोध की डिजिटल अभिव्यक्ति पर नजर
इन खेलों की लोकप्रियता के बीच दिल्ली पुलिस भी इस नई डिजिटल गतिविधि पर नजर रख रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पुलिस गेमिंग की इस दुनिया पर निगरानी कर रही है। इन खेलों के जरिए युवा वास्तविक घटनाओं को व्यंग्य, चुनौती और मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह को लेकर बनी परिस्थितियों के बीच डिजिटल मंच अब विरोध की घटनाओं को दर्ज करने और उन पर प्रतिक्रिया देने का एक नया माध्यम बनकर उभरा है।

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