शहर बदला, अधिकारी बदले, लेकिन हाईटेक सिटी का संगठित पराठा गैंग नहीं बदला। साल दर साल पराठा गैंग का विस्तार होता गया और सेक्टरों में अतिक्रमण व गंदगी की समस्याएं बढ़ती गईं। शहर के किसी भी सेक्टर में घुस जाएं तो यह समस्या दिखेगी। खासकर औद्योगिक सेक्टरों में तो अवैध रूप से लगीं पराठे की दुकानें प्राधिकरण व पुलिस की मिलीभगत से चलती हैं।
नोएडा: शहर बदला, अधिकारी बदले पर नहीं बदला ‘पराठा गैंग’, अवैध रूप से चला रहा लाखों का कारोबार
औद्योगिक सेक्टरों में सबसे ज्यादा अतिक्रमण
शहर के औद्योगिक सेक्टरों में आईटी कंपनियां व फैक्ट्रियां हैं। यहां खाने पीने की दुकानें नहीं हैं। अधिकतर कंपनियों में कैंटीन की भी व्यवस्था नहीं है। इस कारण औद्योगिक सेक्टरों के अंदर पराठे की दुकान लगाने की परंपरा की शुरुआत हुई। सुबह से लेकर रात तक अलग-अलग किस्म के पराठे बिकने लगे। धीरे-धीरे बड़ी-बड़ी कंपनियों के पास पराठे की दुकान अतिक्रमण कर बनाई जाने लगी। देखते ही देखते इसने एक कारोबार का रूप धारण कर लिया। जब इस धंधे में काफी फायदा होने लगा तो सफेदपोश इस धंधे में घुसने लगे। औद्योगिक सेक्टरों में रोजाना लाखों की कमाई होती है।
नाम पराठे का, मिलता है सब कुछ
औद्योगिक सेक्टरों में पराठे की दुकानों की आड़ में सब कुछ बेचा जा रहा है। पहले पराठे की दुकान खोलते हैं बाद में चावल दाल, रोटी से लेकर फास्ट फूड बेचने लगते हैं। इसके बाद शराब से लेकर अन्य प्रतिबंधित सामानों की भी बिक्री होती है। यह सब स्थानीय पुलिस की जानकारी में रहता है। पुलिस चौकी में तैनात बीट कांस्टेबल व चौकी इंचार्ज को सब पता होता है।
इन स्थानों पर सबसे अधिक मारामारी
शहर में आवासीय सेक्टरों को छोड़ दें तो पराठा गैंग की मारामारी सब जगह है। गोलचक्कर से शुरू हो जाइए तो सेक्टर-1, 2, 3, 4, 5, 6, 8, 10, 11,12, 15, 16, 18, 19, 22, 27, 29, 37 तक इनका कब्जा दिख जाएगा। इससे आगे बढ़ेंगे तो सेक्टर-57, 58, 59, 60, 62, 63, 64, 65, 66, 67,70, 71 के इलाके में पराठा गैंग का दबदबा दिख जाएगा।
एक्सप्रेस वे और मेट्रो स्टेशन नया केंद्र बना
कुछ सालों में एक्सप्रेसवे के किनारे सैकड़ों की संख्या में कंपनियों ने अपना विस्तार किया है। इसके बाद इस इलाके में पराठे की दुकानों की बाढ़ आ गई है। दरअसल, एक्सप्रेसवे पास दूर-दूर तक कोई मार्केट न होने के कारण पराठा गैंग ने यहां अपना ध्यान केंद्रित कर लिया। यहां इस गैंग को सफलता भी मिल रही है। वहीं मेट्रो स्टेशन के आसपास भी इस गिरोह का कब्जा हुआ है। यहां भी कई ऐसी दुकानें चल रही हैं।