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बुराड़ी कांड: फांसी पर झूलते 11 शव, सालभर बाद भी याद आते ही खड़े हो जाते हैं रोंगटे

Fri, 28 Jun 2019 01:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 28 Jun 2019 01:00 PM IST
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One year of burari case one home 11 dead bodies story still haunts people

1 जुलाई 2018 की सुबह जब दिल्ली के बुराड़ी स्थित एक घर में 11 लोग फांसी के फंदे पर झूलते मिले तो हर कोई अचंभित और खौफजदा था। कुछ ही देर में यह घटना देश के कोने कोने तक पहुंच गई। हर कोई भाटिया परिवार के साथ हुई इस घटना की वजह जानना चाहता था। लेकिन इस घटना ने दिल्ली पुलिस से लेकर फॉरेसिंक विशेषज्ञों तक के पसीने छुड़ा दिए। फिलहाल अंधविश्वास से जोड़ते हुए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कुछ रिपोर्ट का इंतजार करते हुए मामले की जांच कर रही है। 

One year of burari case one home 11 dead bodies story still haunts people
burari death case - फोटो : अमर उजाला

बहरहाल कुछ ही दिन बाद इस घटना को एक वर्ष पूरा होने वाला है लेकिन दिल्ली वालों के लिए बुराड़ी की घटना आज भी ताजा है। घटना के कई माह बाद तक इलाके में भाटिया परिवार के मकान को लेकर तरह तरह की अफवाहें उड़ती रहीं। कई लोगों ने इस मकान को भूतिया तक कहा, लेकिन चूड़ावत परिवार के एकमात्र बड़े भाई ने इन अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया।

One year of burari case one home 11 dead bodies story still haunts people
burari death case - फोटो : अमर उजाला

राजस्थान में रह रहे सबसे बड़े भाई दिनेश बताते हैं कि बुराड़ी में दौड़ रहीं अफवाहें उनके कानों तक भी पहुंचती थीं। इलाके के लोगों ने उनके मकान को भूतिया बना दिया था लेकिन ललित की दुकान पर काम करने वाले पप्पू और उसके भाई गुड्डू ने इन अफवाहों पर ध्यान न देते हुए मकान में रहना शुरू किया।

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One year of burari case one home 11 dead bodies story still haunts people
burari death case - फोटो : अमर उजाला

दिनेश का कहना है कि उनके लिए वह मकान नहीं, बल्कि एक मंदिर समान है। भले ही आज बुराड़ी के 2 नंबर की गली में मौजूद 137 नंबर मकान लोगों के लिए भय का जरिया बना हो, लेकिन उनके लिए उस घर से काफी यादें जुड़ी हैं। इसलिए वे मकान को बेचने के बारे में सोच भी नहीं सकते। 

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One year of burari case one home 11 dead bodies story still haunts people
burari death case - फोटो : अमर उजाला

मोक्ष के चक्कर में ये जिंदगियां हुईं थीं खत्म
बुराड़ी के चूंडावत परिवार में 77 वर्षीय नारायण देवी, 50 वर्षीय भावनेश, 45 वर्षीय ललित, बहन 57 वर्षीय प्रतिभा, भावनेश की 48 वर्षीय पत्नी सविता, उनके बच्चे 25 वर्षीय निधि, 23 वर्षीय मीनू, 15 वर्षीय ध्रुव, ललित की 42 वर्षीय पत्नी टीना, उनका 15 वर्षीय बेटा शिवम और 33 वर्षीय भांजी प्रिंयका मोक्ष के चक्कर में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। इनमें से 9 सदस्यों के शव फंदे पर झूल रहे थे। जबकि नारायणी देवी का शव अंदर कमरे में जमीन पर था। रसोई में तमाम तरह के व्यंजन बने हुए थे। घर में अगरबत्ती की महक थी। टेलीफोन के तार से 9 लोगों के हाथ पैर बंधे थे और मुंह व आंखों पर चुन्नी थी। 

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