हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पत्नी पायल अब्दुल्ला की सरकारी आवास मांगने संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पायल ने पहले से मिले आवास को खाली करवाने के सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी है।
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उमर अबदुल्ला का सरकारी बंगला पुलिस ने जबरन खाली कराया
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 19 नवंबर तय की है।
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उमर अबदुल्ला का सरकारी बंगला पुलिस ने जबरन खाली कराया
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पायल के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि सिंगल जज ने 19 अगस्त को बंगला खाली करवाने संबंधी आदेश देते हुए कई तथ्यों को नजर अंदाज किया है। उन्होंने कहा कि पायल को सरकार ने जैड व उनके पुत्रों को जैड प्लस सुरक्षा प्रदान की हुई है। अब वह किराए के फ्लैट में रह रही है जहां उनकी सुरक्षा संभव नहीं है क्योंकि उनको काफी सुरक्षाकर्मी मिले हुए है।
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उमर अबदुल्ला का सरकारी बंगला पुलिस ने जबरन खाली कराया
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उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने यह कैसे निष्कर्ष निकाल लिया कि पायल के पति व ससुर को भी जैड सुरक्षा मिली है और वे भी निजी आवास में रह रहे है तो पायल क्यों नहीं। उन्होंने कहा दोनों दिल्ली के नियमित निवासी नहीं है और कभी-कभी आते है ऐसे में उनकी सुरक्षा कुछ अवधि के लिए संभव है।
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वहीं पायल दिल्ली की स्थाई निवासी है और बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं अत: छोटे फ्लैट में सुरक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पायल से आवास खाली करवाने में भी तय नियमों का उल्लंघन हुआ है। सूर्यास्त के बाद कभी भी सरकारी आवास खाली नहीं करवाया जा सकता जबकि देर शाम जबरन आवास खाली करवाया गया।