भलस्वा लैंडफिल साइट की आग स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। बीते 72 घंटों में भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। रूक-रूककर कूड़े के पहाड़ से आग की लपटें उठ रही हैं। हालत यह है कि धूल और धुएं की चादर को कई किलोमीटर की दूरी से देखी जा सकती है। इस वजह से समूचे दिल्ली-एनसीआर में भलस्वा लैंडफिल के आसपास की हवा की सेहत सबसे खराब है। परिणामस्वरूप लोगों को आंखों में जलन के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां शुरू हो गई हैं।
कब बुझेगी भलस्वा की आग?: हर तरफ धुआं-धुआं, लोगों का फूल रहा दम, पूरे इलाके की हवा खराब
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दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 36 निगरानी केंद्र बनाए गए हैं। इसमें दिल्ली के तीनों कूड़ों के पहाड़ भलस्वा, ओखला व गाजीपुर के आसपास के इलाकों में भी निगरानी केंद्रों को स्थापित किया गया है। भलस्वा लैंडफिल साइट के पास जहांगीरपुरी और अलीपुर निगरानी केंद्र हैं। आग लगने के दो दिनों के भीतर ही दोनों निगरानी केंद्रों पर हवा की सेहत खराब से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई। बुधवार तक जहांगीरपुरी में 296 एक्यूआइ के साथ हवा खराब श्रेणी में थी जो कि बृहस्पतिवार तक 343 एक्यूआइ के साथ बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। वहीं, अलीपुर में बुधवार तक जहां एक्यूआइ 219 था, वह बृहस्पतिवार तक 318 एक्यूआइ रहा। इस वजह से दिनभर लोगों को आंखों में जलन के साथ सांस लेने में तकलीफ हुई।
दिल्ली की अन्य लैंडफिल साइट ओखला के आसपास हवा की सेहत 266 एक्यूआइ के साथ खराब श्रेणी में रही। इसके अलावा गाजीपुर के पास पटपड़गंज की हवा भी 274 एक्यूआइ के साथ खराब श्रेणी में रही है। दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली का एक्यूआइ 295, गाजियाबाद 296, गाजियाबाद 328, ग्रेटर नोएडा 269, गुरुग्राम 303 व नोएडा 322 एक्यूआइ रहा। वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले एजेंसियों का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में भी हवा की सेहत में सुधार की संभावना नहीं है। बीते 24 घंटे में हवा में पीएम 10 का स्तर 309 व पीएम 2.5 का स्तर 144 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रहा।
आबोंहवा से खराब हुई किडनी तो दो किलोमीटर दूर बनाया आशियाना
इलाके की आबोंहवा की असर लोगों की सेहत पर इस कदर पड़ रहा है कि लोग यहां से जाने को मजबूर हैं। इलाके में बीते 35 वर्षों से रहने वाले जवाहर का आरोप है कि उनकी किडनी यहां का गंदा पानी पीकर खराब हो चुकी है। इस वजह से उन्हें 2016 में किडनी का प्रत्यारोपण कराना पड़ा। लैंडफिल साइट से आने वाली धूल व दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी के कारण दो किलोमीटर दूर कमरा बनवा लिया है। उम्मीद थी कि बीते 20 सालों में लैंडफिल साइट खत्म हो जाएगी, लेकिन अब घर बेचने की मजबूरी सामने आ गई है। इसी प्रकार सी-ब्लॉक में रहने वाले सोनू का छह लोगों का परिवार है। परिवार में डेढ़ साल का एक बच्चा है, जिसे दुर्गंध व धूल के कारण सांस लेने में पेरशानी होती है। वहीं, घर में रहने वाले बुजुर्ग भी इस समस्या से दूर नहीं हैं।
बीते 23 वर्षों से इलाके में रह रहे अखिलेश ठाकुर कहते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि कुछ सालों में यह कूड़े का पहाड़ खत्म हो जाएगा, लेकिन सरकारें आईं और गईं, लेकिन आज भी यह पहाड़ लोगों का दम घोंटने का काम कर रहा है। स्थानीय दुकानदार चंद्रेश्वर कहते हैं कि कई बार इस समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन हर बार की तरह सिर्फ आश्वासन की फाइल ही हाथों में आई।
भलस्वा लैंडफिल साइट
जहांगीरपुरी- 343
अलीपुर-318
गाजीपुर लैंडफिल साइट
पटपड़गंज- 274
ओखला लैंडफिल साइट
ओखला फेज 2- 266