ट्विन टावर ध्वस्तीकरण के बाद 80 हजार मीट्रिक टन मलबा हटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। दावा किया गया है कि तीन माह के भीतर मलबे का निस्तारण कर दिया जाएगा। इस मलबे को देखकर आसपास रहने वाले लोग ये सोचकर खुश होंगे कि भ्रष्टाचार के दोनों टावर गिरा दिए गए। वह जब भी टावर की तरफ देखेंगे उन्हें सुखद एहसास होगा, लेकिन उनके करीब पड़े मलबे को उठाने के दौरान भी उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Twin Towers: 80 हजार टन मलबा हटाने की चुनौती, तीन महीने में कर दिया जाएगा निस्तारण
छावनी बना रहा चार किमी का इलाका
ट्विन टावर गिराने के दौरान लोगों को नियंत्रित करने, रूट डायवर्जन और किसी अनहोनी से निपटने के लिए इंतजाम बड़ी चुनौती थी। लोगों को घटनास्थल से दूर रखने के लिए चार किमी क्षेत्र में आला अधिकारियों से लेकर सिपाही तक मुस्तैद रहे। एनडीआरएफ की दो टीमें तैनात थीं। पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
डीसीपी सेंट्रल जोन राजेश एस अभियान के कमांडर थे। पांच एसीपी अब्दुल कादिर, महेंद्र देव सिंह, पीपी सिंह, रजनीश वर्मा सहित पांच सब कमांडर तैनात किए गए। बड़ी संख्या में दरोगा, सिपाही और अन्य पुलिसकर्मी व अधिकारी कड़ी धूप में डटे रहे। वहीं, फरीदाबाद-जेपी फ्लाईओवर पर इंसीडेंट कमांड सेंटर वैन में जिलाधिकारी सुहास एलवाई, पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह और सीईओ नोएडा रितु माहेश्वरी मौजूद रहीं।
निगरानी के लिए एक रेडियो सेंटर भी इंसीडेंट कमांड सेंटर वैन में तो दूसरा गेझा में था। सीसीटीवी से निगरानी की जा रही थी। कमांडर व सब कमांडर अधिकारियों को अपडेट दे रहे थे। आला अधिकारियों ने दोपहर 2:30 बजे सभी पांच कमांडर से अपडेट लेने के बाद टावर गिराने का निर्देश दिया। इसके बाद दोपहर 2:31 बजे टावर गिरा दिए गए।
रियल एस्टेट के लिए एक सबक : क्रेडाई
बिल्डरों के संगठन क्रेडाई (नेशनल) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटोदिया ने कहा कि ट्विन टावरों का गिरना रियल एस्टेट क्षेत्र के सभी हिस्सेदारों के लिए सबक है। उन्होंने कहा, यह कदम उस नए भारत को दिखाता है जिसमें हम रह रहे हैं। यह पूरी तरह बेहतरीन व्यवहार, शासन और कानून के पालन से संबंधित है।
सफल रहा ढहाने का अभियान : माहेश्वरी
नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी ने कहा कि ट्विन टावरों का ध्वस्तीकरण सफल रहा है और आस-पास के निवासी सुरक्षा मंजूरी के बाद घर लौट सकेंगे। एडिफिस, सीबीआरआई और जेट डिमोलिशन की टीमें मुआयना कर यह देखेंगी कि वहां कोई विस्फोटक बचा तो नहीं रह गया है।