भ्रष्टाचार की नींव पर खड़े सुपरटेक बिल्डर के 915 फ्लैट और 21 दुकानों वाले एपेक्स और सियान टि्वन टावर रविवार को मात्र 12 सेकंड में ध्वस्त हो गए। रविवार दोपहर 2:25 बजे सायरन बजने के साथ ही अंतिम गिनती शुरू हुई। 2 बजकर 31 मिनट पर टावर में धमाका हुआ। जमीन में कंपन के साथ अगले कुछ पलों में ही दोनों टावर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।
Twin Towers: ताश के पत्तों की तरह ढह गए ट्विन टावर, 80 हजार टन मलबा निकला, साढ़े चार मंजिल ऊंचा
12 ब्रह्मोस मिसाइलों जितना विस्फोटक
इमारतों के पिलरों में करीब 9,800 छेद किए गए थे। इनमें करीब 3,700 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। यह विस्फोटक 3 अग्नि, चार पृथ्वी अथवा 12 ब्रह्मोस मिसाइलों के बराबर था।
पहले सियान टावर गिरा
पहले 29 मंजिला सियान टावर और तुरंत बाद 32 मंजिला एपेक्स टावर गिरा।
पहला धमाका : दोनों टावर में फ्लोर बी-1, 2, 6, 10, 14, 18, 22, 26 और 32 पर।
दूसरा धमाका : फ्लोर 4, 8, 12, 16, 20, 24, 28 और 30 पर।
0.4 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका
अधिकारियों के अनुसार, धमाके से जो कंपन पैदा हुआ वह रिक्टर स्केल पर 0.4 तीव्रता के भूकंप जितना था। नोएडा की अधिकांश इमारतें 6 तीव्रता से भी अधिक का भूकंप सह सकती हैं। इसलिए खतरे की गुंजाइश नहीं मानी जा रही थी।
10 ब्लैक बॉक्स से रिकॉर्डिंग
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विस्फोट का रिकॉर्ड रखने के लिए दोनों टावरों में 10 ब्लैक बॉक्स लगाए हैं। ब्लैक बॉक्स का इस्तेमाल आमतौर पर विमानों में होता है, जो किसी हादसे में भी सुरक्षित बचा रहता है।
अब धूल से जंग...बेसमेंट में भरा जाएगा 60% मलबा
तीन माह के अंदर मलबा साफ किया जाना है। टावरों से करीब 80 हजार टन मलबा निकला है। 60 फीसदी मलबा ट्विन टावरों के बेसमेंट में भरा जाएगा। बाकी मलबा सीएंडडी प्लांट पर पहुंचाया जाएगा। मलबे से करीब 4000 टन सरिया निकलेगा। करार के मुताबिक इसे एडिफिस कंपनी ले जाएगी।
100 डेसिबल के पार पहुंची धमाके की आवाज
धमाके से 101 डेसिबल तक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया। वहीं, पांच किलोमीटर तक हवा के साथ गए हानिकारक धूलकण। एक सप्ताह तक लगातार पानी का छिड़काव कराना होगा।
करोड़ों रुपये का हुआ नुकसान : टावर में 900 फ्लैटों की वर्तमान बाजार दर 700 करोड़ थी। 17.5 करोड़ इन टावरों को गिराए जाने पर खर्च हुए हैं। धमाके से नुकसान को देखते हुए 100 करोड़ का बीमा कराया गया था।
इसलिए ढहाई गईं इमारतें : बनना था पार्क, बना दिए टावर
सुपरटेक को नोएडा अथॉरिटी से 2005 में 9 मंजिल वाले 14 टावर बनाने की मंजूरी मिली थी। बाद में तीन नए टावर जोड़े। 40 मंजिल की अनुमति मिली। 2005 की योजना में यहां पार्क था। अफसरों से मिलीभगत कर बिल्डर ने लैंड यूज बदलवाया। दो नए टावर खड़े किए। एमराल्ड कोर्ट के मूल आवंटियों ने कोर्ट में इनका विरोध किया। 32 मंजिला एपेक्स टावर और सोसाइटी के 12 मंजिला एस्टर-2 टावर के बीच सिर्फ 9 मीटर का फासला था, जबकि नियमत: इसे 16 मीटर होना चाहिए था। टावर गिराने के फैसले में इस नियम का उल्लंघन बड़ी वजह बना।
सबक...कानून से ऊपर कोई नहीं
भ्रष्टाचार के इन टावरों के गिरने से साबित होता है कि कानून से कोई बच नहीं सकता। यह कदम नए भारत को दिखाता है जिसमें अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत पर कड़ा प्रहार हुआ है। अब रिएल एस्टेट कंपनियां अवैध निर्माण के पहले सौ बार जरूर सोचेंगी।