नोएडा शहर में सोमवार को सड़कों पर उतरे श्रमिकों की मांगे भले एक जैसी थीं लेकिन इनका उग्र प्रदर्शन नेतृत्व विहीन था। यही बड़ी वजह रही कि प्रदर्शन को संभाल पाना प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती का सबब बना। अधिकारी श्रमिकों से बात कर उनकी मांगों पर शासन और प्रशासन के सकारात्मक रुख की जानकारी देना चाह रहे थे।
हंगामा कर रहे श्रमिकों को समझाकर भी रोका जा सकता था। 0वार्ता के लिए इस प्रदर्शन की अगुवाई करने वाला कोई भी संगठन नहीं था न ही कोई नेता था। अलग-अलग कंपनी व फैक्टरी के श्रमिक अलग-अलग ही सड़क पर उतरे।
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नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को समझाते पुलिस अफसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नतीजा यह हुआ कि औद्योगिक सेक्टरों में भी चारों तरफ चक्का जाम की स्थिति बन गई। फिर यह भीड़ बेकाबू हुई तो तोड़फोड़ शुरू हो गई। कई जगह पर अगजनी भी हुई। उपद्रव रोका जाए या वार्ता कर अलग-अलग कंपनी के श्रमिकों को समझाया जाए इस दुविधा के चौराहे पर पुलिस प्रशासन नजर आया।
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नोएडा में वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन
- फोटो : पीटीआई
यह भी नहीं कहा जा सकता है कि श्रमिकों के इस प्रदर्शन से जुड़ी पूर्व सूचना पुलिस-प्रशासन को नहीं थी। प्रदर्शन इतना बड़ा और उग्र होगा यह अंदाजा भले नहीं होगा। पुलिस ने रविवार की देर शाम से ही औद्योगिक सेक्टरों को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेंडिंग और बांस-बल्ली लगाना शुरू कर दिया था।
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नोएडा में वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन
- फोटो : पीटीआई
देर रात तक यह तैयारी चली। सोमवार सुबह सामान्य तरीके से कंपनियां खुलीं और शांति से श्रमिक आए। लेकिन काम करने आए श्रमिक अचानक प्रदर्शन में शामिल होना शुरू हो गए। फिर फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र से हुई शुरुआत तेजी से सेक्टर-57, 58, 59, 62, 63 की तरफ फैली।
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नोएडा में कर्मचारियों का प्रदर्शन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस बीच ही सेक्टर-15 की तरफ भी श्रमिकों का प्रदर्शन शुरू हो गया।मंगलवार को पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए सुबह से ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए टीमें काफिलें के रूप में निकलीं।