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आरटीपीसीआर रिपोर्ट में देरी बनी चुनौती: समय से रिपोर्ट न आने से टल रहा इलाज, मृत्यु दर बढ़ने का खतरा

Wed, 14 Apr 2021 10:20 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 14 Apr 2021 10:20 AM IST
सार

मामले में कई मरीजों का कहना है कि रिपोर्ट आना तो दूर प्रदेश लैब की वेबसाइट पर उनका डाटा भी अपलोड नहीं किया गया है। ऐसे में उनके सैंपल के संबंध में जानकारी नहीं मिल पा रही है। रिपोर्ट में देरी होने से संदिग्धों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ  इलाज प्रभावित हुआ है, बल्कि अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।

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Gautam budh nagar delay in rt pcr report creating problem in treatment may result in increasing deaths
corona virus - फोटो : अमर उजाला

गौतमबुद्ध नगर में संक्रमण की रफ्तार दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वहीं, सरकारी अस्पताल में कोरोना जांच रिपोर्ट का इंतजार भी लंबा हो रहा है। समय से रिपोर्ट नहीं मिलने से संदिग्धों के इलाज से लेकर संक्रमण की रोकथाम तक कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इससे मृत्युदर बढ़ने का खतरा भी है।

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coronavirus - फोटो : अमर उजाला

वहीं, अस्पतालों के बीच तालमेल नहीं होने की सजा मरीजों को भुगतनी पड़ रही है। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल और ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स इस मामले में आमने-सामने हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, उनके पास जांच कराने वाले हर मरीज का डाटा दर्ज है। सभी के सैंपल उसी दिन या अगले दिन जिम्स भेजे गए हैं। सैंपल का पूरा डाटा हार्ड व सॉफ्ट कापी में भेजा गया है।

Gautam budh nagar delay in rt pcr report creating problem in treatment may result in increasing deaths
कोरोना वायरस: सैंपल लेता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में देरी लैब से हो रही है। वहीं, जिम्स के डायरेक्टर बिग्रेडियर राकेश गुप्ता का कहना है कि संस्थान में हर दिन करीब पांच हजार नमूनों की जांच हो रही हैं। कोई रिपोर्ट लंबित नहीं है। हमारी ओर से सभी रिपोर्ट समय से भेजी जा रही हैं और कोई सैंपल मिसिंग नहीं है। अब सवाल यह है कि दोनों अस्पतालों में से किसकी बात पर भरोसा किया जाए।
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Gautam budh nagar delay in rt pcr report creating problem in treatment may result in increasing deaths
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

मरीजों को लगाने पड़ रहे चक्कर
मामले में कई मरीजों का कहना है कि रिपोर्ट आना तो दूर प्रदेश लैब की वेबसाइट पर उनका डाटा भी अपलोड नहीं किया गया है। ऐसे में उनके सैंपल के संबंध में जानकारी नहीं मिल पा रही है। रिपोर्ट में देरी होने से संदिग्धों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ  इलाज प्रभावित हुआ है, बल्कि अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। अस्पताल में जांच कराने वाले विनोद ने बताया कि 4 दिन बाद भी रिपोर्ट मिलना तो दूर जांच कराई थी, इसका कोई प्रमाण नहीं है। प्रदेश पैथलैब की साइट पर कोई जानकारी नहीं है। वहीं, सेक्टर-31 निवासी उर्मिला ने बताया कि 6 दिन हो गए हैं। तबीयत पहले से ज्यादा खराब लगने लगी है, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिल रही है। ऐसे में इलाज भी नहीं हो पा रहा है।

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- फोटो : अमर उजाला

24 घंटे में रिपोर्ट मिलने का है नियम
कोविड जांच के बाद 24 घंटे में रिपोर्ट मिलने का नियम है, लेकिन जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच के लिए आने वाले मरीजों को एक हफ्ते बाद रिपोर्ट मिल रही हैं। लोग रिपोर्ट के लिए अस्पताल में धक्के खा रहे हैं। रिपोर्ट के लिए कई मरीज अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन लंबी लाइन के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद भी रिपोर्ट नहीं आने की सूचना मिलती है। 

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