आम चुनाव से पहले अपने आखिरी बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के 50 करोड़ गरीबों के लिए महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा करते हुए कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए खजाना खोल दिया, लेकिन मध्य वर्ग को राहत पहुंचाने को खास तवज्जो नहीं दी।
स्टैंडर्ड डिडक्शन से नहीं होगा आम आदमी को खासा फायदा, जानें क्या थी बजट की गेम चेंजर स्कीम
आयकर की दरों और स्लैब का जस का तस रखते हुए वित्त मंत्री ने परिवहन एवं चिकित्सा खर्च पर रियायत को खत्म करते हुए वेतनभोगियों के लिए 40 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन की घोषणा की है। अभी परिवहन और चिकित्सा खर्च के मद में 34,200 रुपये की आय करमुक्त है। इस तरह स्टैंडर्ड डिडक्शन से कोई खास फायदा नहीं होने जा रहा है।
गेम चेंजर स्कीम
इस बजट की एक योजना को गेम चेंजर कहना हो तो वह है 10 करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये की बीमा सुविधा देने वाली नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम। इससे 50 करोड़ लोगों को बीमा कवर मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी यह बीमा योजना 2022 तक नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।
गांव व किसान पर फोकस
किसानों को पैदावार का सही मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना करने की घोषणा की गई। रबी की कई फसलों पर इसे पहले ही लागू किया जा चुका है जबकि आगामी खरीफ फसलों के लिए इसे जल्दी ही घोषित कर दिया जाएगा। वर्ष 2018-19 में कृषि क्षेत्र को 11 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया जाएगा, जो पिछले बजट में 10 लाख करोड़ था। इसके अलावा ऑर्गेनिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि निर्यात, कृषि उत्पाद की मार्केटिंग को लेकर कई बड़ी घोषणाएं भी की गई हैं। किसान क्रेडिट कार्ड का फायदा मछली पालन और पशुपालन क्षेत्र को भी मिलेगा। बांस पर आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नेशनल बंबू मिशन की घोषणा की गई है।
रोजगार पर जोर
रोजगार बढ़ाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) के विकास पर खासा जोर दिया गया है। इसके तहत 250 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों पर कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 से घटाकर 25 फीसदी कर दी गई है। कंपनियों के नए कर्मचारियों के लिए तीन साल तक भविष्य निधि में 12 फीसदी का अंशदान सरकार करेगी।