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रोंगटे खड़े और दिलों को तोड़ने वाली थी निठारी की क्रूरता, अदालत ने की तल्ख टिप्पणी

Sun, 07 Apr 2019 09:17 AM IST
शाहरुख खान राहुल कुमार, अमर उजाला, गाजियाबाद
राहुल कुमार, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 07 Apr 2019 09:17 AM IST
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Nithari Case court remarked in its 78-page verdict on Surendra Koli
अदालत से बाहर आते हुए सुरेंद्र कोली - फोटो : अमर उजाला
हर बार की तरह ही इस बार भी सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह ने निठारी कांड के मामले में शनिवार को अपने 78 पेज के फैसले में तल्ख टिप्पणी की। इस बार अदालत ने फैसले में लिखा कि निठारी कांड के दौरान कोली द्वारा की गई क्रूरता रोंगटे खड़े कर देने वाली, दुखद, कानूनिक, दिल तोड़ देने वाली, चेतना भंग करने वाली और समाज की दुर्दशा करने वाली घटना रही है। विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘अमानवीय, बर्बर, पिशाचिक प्रकृति का कोली मुल्जिम है। उसके कृत्य ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। 

 
Nithari Case court remarked in its 78-page verdict on Surendra Koli
अदालत से बाहर आते हुए वकील - फोटो : अमर उजाला
अगर मुल्जिम पर किसी प्रकार की दया दिखाई जाएगी तो इससे समाज न्याय व्यवस्था से भरोसा उठने की प्रबल संभावना है। फैसले में लिखा कि अभियुक्त कृत्य विरल से विरलतम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में अभियुक्त के साथ उदारता का व्यवहार करना समाज एवं विधि के न्यायसंगत सिद्धांतों से खिलवाड़ करना होगा। उन्होंने लिखा कि न्यायालय के समक्ष साबित हुए आरोप के संदर्भ में अधिकतम दंड देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह जाता है। वहीं, पिछली बार अदालत ने कहा था कि दोष सिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे जो सभ्य समाज के लिए नासूर व खतरा बन चुके हैं, को सजा-ए-मौत से दंडित किया जाए। अभियुक्तों ने हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दीं थी।

सजा सुनाते ही तोड़ दी कलम

Nithari Case court remarked in its 78-page verdict on Surendra Koli
nithari case - फोटो : अमर उजाला
सीबीआई न्यायाधीश ने पिछली बार की तरह ही इस बार भी आरोपी को सजा ए मौत सुनाने के बाद अपनी कलम तोड़ दी। इससे पहले भी दो मार्च को हुए फैसले में अदालत ने अपनी कलम तोड़ दी थी। अदालत ने कहा कि नौकर सुरेंद्र कोली को समाज के लिए कहा कि वह अमानवीय, बर्बर, पिशाचिक प्रकृति का अभियुक्त है।
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सजा सुनने के लिए नहीं आए किशोरी के परिजन

Nithari Case court remarked in its 78-page verdict on Surendra Koli
nithari case - फोटो : अमर उजाला
लोक अभियोजक ने बताया कि ने बताया कि उन्हें आश थी कि शनिवार को अदालत में मृतका किशोरी के परिजन सजा सुनने के लिए अदालत में आएंगे, लेकिन वह नहीं आए। क्योंकि शुक्रवार को भी दोषी करार दिए जाने के दौरान वह लोग नहीं आए थे। इस मामले में किशोरी के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। वह इन दिनों नोएडा में ही रहते हैं।
 
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मृतका के मामले में हुई कार्रवाई पर एक नजर

Nithari Case court remarked in its 78-page verdict on Surendra Koli
nithari case - फोटो : अमर उजाला
युवती गुम हुई 21 जून 2005 को
हत्या का मामला सेक्टर-20 नोएडा में दर्ज हुआ - 23 जून 2005
कोली गिरफ्तार- 29 दिसंबर 2006
सीबीआई ने मामला दर्ज किया - 10 जनवरी 2007
सीबीआई ने कोर्ट में पेश की चार्जशीट - 09 अप्रैल 2008
सजा पर बहस मुकर्रर 06 अप्रैल 2019
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