निठारी कांड के 11वें मामले में सीबीआई कोर्ट से सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा मिलने के बाद निठारी में डी-5 कोठी के आगे शनिवार को पहले की तरह सन्नाटा पसरा रहा। आसपास रहने वाले लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। निठारी कांड के अधिकतर पीड़ित अब वहां नहीं रहते हैं।
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nithari case
- फोटो : अमर उजाला
डी-5 के सामने ही काम करने वाले एक पीड़ित ने बताया कि हम लोग कोर्ट के फैसले पर क्या कह सकते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि मामले में सभी दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अन्य लोगों से भी बात की गई तो उन्होंने कहा कि पंधेर इन मामले से कैसे बरी होता जा रहा है। इस पर विश्वास नहीं हो रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
पत्नी को गांव भेजने के बाद कोली बन गया था हैवान
केस से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2004 में मोनिंदर सिंह पंधेर ने परिवार को पंजाब भेज दिया था। इसके बाद सुरेंद्र कोली ने भी पत्नी को गांव भेज दिया। कई महीनों तक अकेले रहने के दौरान कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हो गई।
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- फोटो : अमर उजाला
कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था, लेकिन नौकर होने से कामयाब नहीं हो पाता था। ऐसे में वह धीरे-धीरे मानसिक बीमारी से ग्रसित होकर बच्चों के प्रति आकर्षित होने लगा। इसके बाद वह मासूमों की जिंदगी से खेलने लगा।
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पंधेर की कोठी
- फोटो : राजन राय/अमर उजाला
एक बार गया था कोठी में
मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पास 29 साल से जूते पॉलिश करने वाले देवराज कहते हैं कि निठारी कांड से पहले एक बार कोठी के अंदर गया था। वहां चमड़े का बड़ा लेदर बैग था जिसकी मरम्मत करनी थी। कोठी के अंदर गया तो मुझे कुछ ऐसा नहीं लगा कि यहां कोई गलत काम होता होगा। इसके बाद मैं गांव चला गया। जब मीडिया में निठारी कांड सुर्खियां बना तो इसकी जानकारी हुई।