निर्भया केसः आखिर क्यों दिल्ली नहीं तमिलनाडु पुलिस के जवान कर रहे दोषियों की सुरक्षा, ये है वजह
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क्यों तमिलनाडु पुलिस के जवान कर रहे दोषियों की सुरक्षा
मौत की सजा पाए दोषी की फांसी की तारीख जब नजदीक आती है तो उनकी सुरक्षा बहुत ज्यादा बढ़ा दी जाती है। इसका कारण होता है कि कहीं ये मुजरिम अपने को कुछ क्षति न पहुंचा लें या कुछ गलत करने की कोशिश न करें। दोषियों की सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए उनसे बात करना भी मना होता है। ऐसे में अगर भाषा की बाध्यता आ जाए तो बात करना और मुश्किल हो जाता है। निर्भया के दोषियों की 24 घंटे निगरानी करने वाले तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवानों को न तो हिंदी आती है न ही अंग्रेजी। ये एक बड़ी वजह है इन जवानों की तैनाती की।
जब सुरक्षाकर्मियों को दोषियों को एक-दूसरे की भाषा समझ नहीं आएगी तो वो एक-दूसरे से बात भी नहीं कर सकेंगे। बात नहीं करेंगे तो उनके बीच कोई कनेक्शन भी नहीं बनेगा और बिना किसी राग-द्वेष के ये जवान हल पल इनकी सुरक्षा में चौकस रहेंगे और इनकी बातों में भी नहीं आएंगे।
सुरक्षा को लेकर अधिकारी फिक्रमंद
जेल नंबर तीन के हाई सिक्योरिटी सेल में बंद निर्भया के दोषियों की सुरक्षा को लेकर अधिकारी काफी फिक्रमंद हैं। जेल मैनुअल के मुताबिक ही फांसी की सजा पाए दोषियों की सुरक्षा दी जा रही है। लेकिन इसमें कोई चूक न हो इसके लिए लगातार इनके सेल को बदला जा रहा है। वहां की सुरक्षा के इंतजाम खुद जेल उपाधीक्षक करते हैं। इन्हें ऐसे सेल में रखा जाता है जहां बाहर में मौजूद सुरक्षाकर्मी आसानी से इन पर नजर रख सके।
साथ ही सेल में इस बात पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि दोषी कभी भी सुरक्षाकर्मियों और सीसीटीवी कैमरे से ओझल न हो सके। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को सख्त निर्देश है कि वे दोषियों से कोई बात नहीं करेंगे। अगर उन्हें किसी चीज की जरूरत होगी तो सुरक्षाकर्मी जेल अधिकारियों से संपर्क करेंगे। अधिकारी इस बात पर भी विशेष निगरानी रख रहे हैं कि दोषी खाना न छोड़े। इसके लिए लगातार उनका मेडिकल करवाया जा रहा है और उन्हें जेल मैनुअल के मुताबिक ही डाइट भी दी जा रही है।