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निर्भया कांड: इन दो दोषियों की फंदे पर लटकने के बाद जल्द टूटेगी गर्दन, 15 मिनट में हो जाएगा काम तमाम

Wed, 08 Jan 2020 11:21 AM IST
शाहरुख खान परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 08 Jan 2020 11:21 AM IST
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nirbhaya case These two convicts will soon die after hanging them
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाया जाएगा। ठीक 2 घंटे तक चारों दोषी फंदे पर झूलते रहेंगे। इसके बाद डॉक्टर नाड़ी की जांच करने पहुंचेगा। मृत होने की पुष्टि के बाद इसी डॉक्टर के सर्टिफिकेट के आधार पर जेल प्रशासन सजा देने वाले जज को सूचित भी करता है।
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निर्भया का दोषी अक्षय कुमार सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
जेल प्रशासन के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, चार में से दो दोषियों की फंदे पर लटकने के बाद गर्दन जल्दी टूट जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 मिनट में ही इनका काम तमाम हो सकता है। बाकी दोनों दोषी फांसी पर झूलने के बाद कुछ समय तक पैर फड़फड़ाते रहेंगे और इनके दम तोड़ने में वक्त लग सकता है।
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निर्भया का दोषी मुकेश सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
डॉक्टर ने बताया कि जिनका शरीर 65 किलोग्राम से ज्यादा वजन का होता है, उनकी गर्दन जल्दी लंबी होती है। चिकित्सा विज्ञान भी यही कहता है। जेल की भाषा में गर्दन लंबी होने का मतलब होता है गर्दन टूटना। अक्षय और मुकेश का वजन क्रमश: 52 और 67 किलोग्राम के आसपास है। यह लगातार कम होता जा रहा है। 
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निर्भया का दोषी पवन गुप्ता - फोटो : सोशल मीडिया
इसीलिए उन्होंने संभावना जताई है कि इन दोनों दोषियों की गर्दन लंबी होने में थोड़ा ज्यादा वक्त लग सकता है। अन्य दोषी पवन का वजन 81 किलोग्राम बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 65 किलोग्राम से कम वजन वालों की मौत जल्दी नहीं होती है। फांसी पर झूलने के बाद गर्दन लंबी होने में वक्त लगता है। वे अपने पैर फड़फड़ाते रहते हैं। इसीलिए फांसी पर लटकाने के बाद दोषी की नाड़ी जांच करने के बीच 2 घंटे का अंतराल रखा जाता है। 
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Nirbhaya - फोटो : अमर उजाला
तिहाड़ जेल में ऐसा पहले भी हो चुका है। 31 जनवरी 1982 को कुख्यात हत्यारे रंगा और बिल्ला को फांसी दी गई थी। तिहाड़ जेल के पूर्व प्रवक्ता सुनील गुप्ता की किताब ब्लैक वारंट में यह पूरा किस्सा लिखा है। इस किताब के अनुसार, 31 जनवरी 1982 को सुबह 5 बजे रंगा ने स्नान किया था, बिल्ला ने नहीं। 
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