निर्भया के दोषियों के कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद चौथे डेथ वारंट पर सभी दोषियों को फांसी पर लटकाने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। हालांकि दोषी अब भी कोई पैंतरा आजमा कर फांसी टालने की कोशिश नहीं करेंगे ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन आज (5 मार्च) सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से उन सभी प्रयासों पर रोक लग सकती है। आगे जानिए आज सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कौन सी सुनवाई होने वाली है जिसमें अगर याचिकाकर्ताओं के हक में फैसला आता है तो दोषियों का कोई पैंतरा काम नहीं करेगा...
निर्भया केसः दोषियों को अलग-अलग फांसी होगी या एक साथ, सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला
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दरअसल आज सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और दिल्ली सरकार की उस याचिका पर फैसला आना है जिसमें सभी दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की अपील की गई है। दरअसल ये याचिका तब डाली गई थी जब सभी दोषियों ने अपने सारे कानूनी विकल्प इस्तेमाल नहीं किए थे। तब अदालत से यह अनुरोध किया गया था कि उन दोषियों को पहले फांसी दे दी जाए, जिनके सभी कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं।
निर्भया के पिता बोले अब दोषियों को फांसी पर लटकने से नहीं बचा सकेगा कोई
निर्भया के दोषियों के कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद चौथे डेथ वारंट पर सभी दोषियों को फांसी पर लटकाने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। निर्भया के पिता का कहना है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने पटियाला हाउस कोर्ट से नया डेथ वारंट जारी करने की मांग की है और अब उन्हें यकीन है कि दोषी इस बार किसी भी तरह से फांसी पर लटकने से नहीं बच पाएंगे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी पवन की याचिका खारिज करके दोषियों के सभी कानूनी विकल्पों को समाप्त कर दिया है। उन्हें यकीन है कि इस महीने में ही दोषियों को हर हाल में फांसी पर लटका दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अपने बेटी को न्याय दिलवाने के लिए कई सालों से लगातार अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। कई बार दोषियों के कानूनी विकल्पों के कारण दोषियों के वकील फांसी को टलवाने में कामयाब हो चुके हैं। अब हाईकोर्ट में दोषियों की ओर से दायर सभी याचिकाएं भी लगभग खारिज हो चुकी हैं। लिहाजा अब दोषियों को फांसी पर लटकने से कोई नहीं बचा सकेगा।