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निर्भया केस: दोषियों ने पूरी व्यवस्था का मजाक बनाकर रख दिया, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की दलील

Fri, 06 Mar 2020 10:54 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 06 Mar 2020 10:54 AM IST
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nirbhaya case Solicitor General Tushar Mehta argued during hearing
Nirbhaya Case - फोटो : अमर उजाला/सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निर्भया के चारों दोषियों को अलग-अलग फांसी न देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई 23 मार्च तक के लिए टाल दी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से दलील दी कि दोषियों ने फांसी टालने के लिए हर तरह की पैंतरेबाजी की और पूरी व्यवस्था का मजाक बनाकर रख दिया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ को यह जानकारी दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने फिर से डेथ वारंट जारी कर चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने की तारीख 20 मार्च तय की है। 
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एडिशनल सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार को पक्ष रखा। - फोटो : AmarUjala
मेहता ने कहा कि कानून यह जरूर कहता है कि एक मामले के आरोपियों का ट्रायल एकसाथ चलना चाहिए लेकिन एक मामले के दोषियों को फांसी पर एकसाथ लटकाने को लेकर कानून में कोई व्यवस्था नहीं है, लिहाजा इस पर अदालत को व्यवस्था देनी चाहिए। मेहता ने पीठ के समक्ष यह भी कहा कि सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने के बाद भी फांसी की सजा पाए लोगों को जिंदा रखना अमानवीय है।
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निर्भया के दोषी - फोटो : अमर उजाला
मेहता ने कहा कि मुकेश और विनय द्वारा सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है, लिहाजा इन दोनों को फांसी पर लटकाने की इजाजत दी जानी चाहिए। लेकिन पीठ ने इस पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की। पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की याचिका पर मेरिट के आधार पर 23 मार्च को सुनवाई की जाएगी। पीठ ने कहा कि इस मसले पर सुनवाई की दरकार है।
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Nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
क्या हैं जेल के नियम
दिल्ली जेल नियमों के अनुसार अगर किसी मामले में एक से ज्यादा लोग सजा के दोषी पाए जाते हैं तो सभी की सजा पर अमल एक साथ ही होगा। इसके अलावा अगर किसी अपराध में एक से अधिक दोषियों को फांसी सुनाई गई हो तो इन परिस्थितियों में अगर किसी भी दोषी की याचिका लंबित हो तो सभी की फांसी रुक जाती है। इसी का फायदा निर्भया के गुनहगार अब तक उठा रहे थे।
 
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