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#KabTakNirbhaya: अनु के समर्थन में निर्भया की मां बोलीं-'लड़की से मारपीट करने की क्या जरूरत थी'

Sun, 01 Dec 2019 09:14 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 01 Dec 2019 09:14 AM IST
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Nirbhaya case Hyderabad Anu Dubey got Nirbhaya mother support in delhi
अनु को लेकर जातीं - फोटो : अमर उजाला
संसद के बाहर बेटियों को सुरक्षा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाली अनु दुबे को निर्भया की मां का भी साथ मिला। निर्भया की मां का कहना है कि हैदराबाद की घटना ने फिर 2012 की यादें ताजा कर दी हैं। पुलिस पहले तो कभी समय पर पहुंचती नहीं है, उसके बाद जनता के आक्रोश को दबाने का प्रयास करती है। 


 
Nirbhaya case Hyderabad Anu Dubey got Nirbhaya mother support in delhi
अनु के साथ स्वाति मालीवाल - फोटो : अमर उजाला
निर्भया की मां ने अमर उजाला को बताया कि संसद के बाहर हैदराबाद की घटना से डरी-सहमी लड़की किसी को क्या नुकसान पहुंचा सकती थी। मान लिया कि उस इलाके में धारा- 144 लगी हुई है, पर एक अकेली लड़की उस धारा को कैसे तोड़ रही थी। लड़की को आराम से जंतर-मंतर तक पहुंचाया जा सकता था। 
Nirbhaya case Hyderabad Anu Dubey got Nirbhaya mother support in delhi
अनु दुबे को मिला निर्भया का साथ - फोटो : अमर उजाला
अकेली विरोध कर रही लड़की को थाने ले जाकर मारपीट करने की क्या जरूरत थी? लड़की चोट के निशान दिखा रही है। महिला पुलिस अधिकारियों को सब्र से काम लेते हुए उसे समझाना चाहिए था कि विरोध संसद के बाहर नहीं, बल्कि जंतर-मंतर पर किया जाए। 
 
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Nirbhaya case Hyderabad Anu Dubey got Nirbhaya mother support in delhi
अनु दुबे - फोटो : एएनआई
प्रधानमंत्री से सख्त कानून बनाने की मांग: निर्भया के पिता
2012 में मेरी बेटी के साथ जब बर्बरता हुई तो सारा देश सड़कों पर सरकार से बेटियों को सुरक्षित माहौल देने की मांग कर रहा था। हैदराबाद की घटना ने एक बार फिर निर्भया की घटना को याद दिला दी। निर्भया मामले के बाद केंद्र में सरकार बदल गई। आम लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहद उम्मीद थी कि वे बेटियों को सुरक्षित वातावरण देंगे। 
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अनु दुबे - फोटो : सोशल मीडिया
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा तो हैदराबाद में भी पूरा हुआ, अभिभावक ने बेटी को पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाया पर सुरक्षा तो पुलिस देगी। इसलिए प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे अपने इस नारे को पूरा करने के लिए सख्त कानून बनाएं, ताकि भविष्य में किसी बेटी से ऐसी बर्बरता न हो। दूसरा प्रधानमंत्री को इन नेताओं को नसीहत देनी होगी कि अगर उन्हें बोलने नहीं आता तो चुप रहे। नेता अपने बेतुके बयानों के चलते सरकार की भी फजीहत करवाते हैं। 
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