निर्भया के चारों दोषियों पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह और विनय शर्मा ने अपने सभी कानूनी विकल्प सोमवार तक पूरी तरह आजमा लिए हैं। कानूनी रूप से अब दोषियों के पास फांसी को ज्यादा दिनों तक टलवाने के लिए कोई पुख्ता पैंतरा नहीं है। लिहाजा जब कोर्ट चौथा डेथ वारंट जारी करेगा तो उस पर दोषी रोक नहीं लगवा सकेंगे। इससे पहले दोषी अपने कानूनी विकल्पों को अलग-अलग समय पर प्रयोग करके अब तक तीन बार फांसी टलवा चुके हैं।
निर्भया केस : चौथे डेथ वारंट के बाद कोई कानूनी तिकड़म नहीं दिखा पाएंगे दरिंदे
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गेंद अब सरकार के पाले में : तिहाड़ जेल प्रशासन
वहीं, तिहाड़ जेल प्रशासन ने कहा कि गेंद अब सरकार के पाले में है। वहीं, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता की उस याचिका खारिज होने पर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कोर्ट में कहा कि दो दोषियों की दया याचिका बाकी है। ऐसे में दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती। इस पर जज धर्मेंद्र राणा ने कहा कि पूरे विवरण के साथ अदालत में आएं।
कोर्ट में ऐसे चली दिन भर सुनवाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याकूब मेमन के मामले में भी दया याचिका लंबित होने के दौरान फांसी दी गई थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था? इस पर एपी सिंह ने कहा कि मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि अदालत की सहायता कर सकूं। जो आदेश अदालत देगी उसे माना जाएगा क्योंकि मैं अदालत से ऊपर नहीं हूं। इस पर न्यायाधीश ने वकील से पूछा कि फांसी रोकने के लिए कोई ठोस वजह हो तो बताएं?
इस पर वकील ने कहा कि दिल्ली जेल मैनुअल कहता है कि किसी अपराध में शामिल दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जा सकती है। तभी लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि जब एक बार दया याचिका खारिज हो गई थी तो अक्षय ने फिर से दया याचिका क्यों दायर की? इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शाम तक पवन की याचिका पर राष्ट्रपति द्वारा संज्ञान लिए जाने के बारे में कोई जानकारी न उपलब्ध रहने और याचिका लंबित रहने की स्थिति में कोर्ट ने दोषियों की फांसी पर अगली आदेश तक रोक लगा दी।
निर्भया की मां बोलीं, दोषियों का ही साथ दे रहा पूरा सिस्टम
अदालत ने निर्भया के दोषियों के डेथ वारंट पर सोमवार को तीसरी बार रोक लगा दी। इस फैसले से आहत निर्भया की मां फूट-फूट कर रोईं। उन्होंने कहा कि दोषियों के वकील हर बार कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और कानून भी दोषियों का साथ दे रहा है। मैं अब हार चुकी हूं। निर्भया की मां दोषियों की फांसी पर रोक को लेकर सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यही दुआ मांगती रहीं कि दोषियों की फांसी पर इस बार रोक नहीं लगेगी, लेकिन अंत में अदालत ने दोषियों की फांसी पर कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर रोक लगा दी।
निर्भया की मां ने कहा, मैं बीते सात सालों से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं। मैं हर बार हिम्मत बटोरकर अदालत से दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करवाने के लिए खड़ी होती हूं और मुझे लगता था कि इस बार दोषियों को कोई नहीं बचा सकता। उन्होंने रोते हुए कहा कि दोषी खुलेआम कानून के साथ खेल रहे हैं और अदालत के सख्त निर्देशों के बावजूद दोषियों ने फांसी रोकने को कानूनी विकल्पों का प्रयोग योजनाबद्ध तरीके से किया। उन्होंने कहा कि दोषियों के वकील कभी कोर्ट को बताते हैं कि वह दोषी का केस नहीं लडे़ंगे और फिर अचानक दोषी की पैरवी करने लगते हैं। दोषी फांसी के लिए तय तिथि से एक या दो दिन पूर्व दया याचिका दाखिल करते हैं।
फांसी देने के खिलाफ याचिका खारिज
फांसी देने की वैधता की जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दी है। याचिका में अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 354 (5) को चुनौती दी गई थी, जिसके मुताबिक जब किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा दी जाती है, तो उसे तब तक गर्दन से लटकाए रखने का प्रावधान है, जब तक उसकी मौत न हो जाए।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे की पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पहले तय कर चुका है और मौत की सजा बरकरार रख चुका है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान संविधान की मूलभूत संरचना और मौलिक विशेषताओं के खिलाफ है। केरल निवासी 88 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एस परमेश्वरम नमपोथरी द्वारा दायर याचिका में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 354 (5) को खत्म करने की मांग की थी।
गले का नाप लिया गया
जल्लाद के तिहाड़ जेल पहुंचने के बाद दोषियों के गले का नाप, वजन और लंबाई नापी गई। यह सब अगले दिन होने वाली फांसी के ट्रायल के लिए किया गया। जब यह सब प्रक्रिया चल रही थी तो दोषियों को यकीन हो गया कि 3 मार्च को उन्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा। हालांकि डेथ वारंट पर रोक की जानकारी जैसे ही उन्हें मिली तो चेहरे के भाव बदल गए।
जल्लाद के तिहाड़ पहुंचते ही निर्भया के दोषियों के होश उड़े
जल्लाद के रविवार शाम तिहाड़ जेल में पहुंचने के बाद से ही निर्भया के दोषियों के चेहरे पर मौत का खौफ नजर आने लगा। रविवार रात चारों बेचैन थे और रातभर सेल में चहलकदमी करते रहे। उन्हें इस बात का यकीन नहीं था कि अदालत सोमवार को उनके डेथ वारंट पर रोक लगा देगी। जेल सूत्र के मुताबिक सारी प्रक्रिया होने के बाद सभी दोषी गुमसुम होकर अपने सेल में एक किनारे में बैठकर सोचने लगे। कुछ देर बाद सभी सेल में चहलकदमी का सिलसिला रात भर चला। कुछ देर झपकी लेने के बाद तड़के ही उन लोगों की नींद खुल गई। अब फांसी होने का यकीन होने पर वह अपने परिवार वालों से भी मिलने से कतराए। सोमवार को किसी भी दोषी का परिवार वाला उनसे मिलने जेल नहीं पहुंचा।
अलग-अलग फांसी पर पांच को सुनेगा सुप्रीम कोर्ट
पवन की सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भले ही खारिज हो गई हो, मगर पांच मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दायर उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा, जिसमें निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी पर लटकाने को लेकर दिशानिर्देश देने की मांग की गई है।