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दिल्ली हिंसा के बीच भाईचारे की मिसाल, मस्जिद से जुड़े लोगों ने कराया हिंदू का अंतिम संस्कार

Mon, 02 Mar 2020 10:48 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 02 Mar 2020 10:48 PM IST
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Example of brotherhood amid riots, people associated with mosque performed Hindu funeral
मृतक प्रेम सिंह की मां का रो-रोकर बुरा हाल - फोटो : Amar Ujala
हिंसा करके उपद्रवियों ने भाईचारे की जड़ों को खोखला करने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। इसका उदाहरण खुरेजी की नूरुल्लाह मस्जिद के कुछ लोगों ने पेश किया है। मस्जिद के कुछ लोग हिंसा प्रभावितों की मदद के लिए जीटीबी अस्पताल पहुंचे थे। मोर्चरी के बाहर उन्हें सुनीता (25) नामक गर्भवती महिला रोते हुए मिली। 
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दिल्ली हिंसा में मृत प्रेम सिंह का फाइल फोटो - फोटो : Amar Ujala
पूछताछ में पता चला कि उपद्रवियों ने उसके पति प्रेम सिंह (27) की हत्या कर दी थी। उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह उसके शव का अंतिम संस्कार कर सके। इसके बाद मस्जिद के लोगों ने रिक्शा चालक प्रेम सिंह के शव के अंतिम संस्कार का इंतजाम कराया। रविवार शाम कर्दमपुरी के श्मशान घाट पर प्रेम सिंह का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया।
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से यूपी में कासगंज के रजपुरा का रहने वाला प्रेम सिंह सी-ब्लॉक, गली नंबर-3, बृजपुरी में पत्नी सुनीता और एक छोटी बेटी के साथ रहता था। सुनीता 7 माह की गर्भवती है। रिक्शा चालक प्रेम सिंह मंगलवार सुबह करीब 8 बजे बच्ची के लिए दूध लेने के लिए घर से निकला था। इसके बाद वह लापता हो गया। परिजनों ने तलाश की तो अगले दिन उसका शव जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में मिला। 
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मृतक प्रेम सिंह के परिजन - फोटो : Amar Ujala
रविवार को शव का पोस्टमार्टम हो रहा था। इसी दौरान खुरेजी के आराम पार्क स्थित मस्जिद के कुछ लोग जीटीबी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सुनीता को रोते देखकर पूछताछ की तो प्रेम सिंह की बहन सविता ने बताया कि उसके भाई की हिंसा में मौत हो गई है। सुनीता के पास उसके अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं हैं। 
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शव गृह के बाहर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
मस्जिद से गए वसीम, शफीक और फिरोज ने आर्थिक मदद कर प्रेम सिंह के शव का अंतिम संस्कार कराया। कई अन्य परिवारों की भी इन लोगों ने मदद की। वसीम का कहना था कि अल्लाह ने हम सभी को इंसान बनाया है। वह भेदभाव नहीं करता तो हम धर्म और जात के नाम पर भेदभाव करने वाले कौन होते हैं।
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