नवरात्रि यानी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पर्व। नवरात्रि में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और आखिरी दिन देवी दुर्गा स्वरूपा नौ कन्याओं की पूजा होती है। कन्या पूजन को कंजक पूजन के नाम से भी जाना जाता है। कन्या पूजन से मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कन्या पूजन कब और क्यों जरूरी है और कितनी उम्र की कन्याओं का पूजन करना सबसे फलदायी होता है।
नवरात्रिः इस उम्र की कन्याओं का पूजन होता है फलदायी, जानें कब और कैसे करें पूजा
बता दें कि माता के जो भक्त नौ दिन का व्रत नहीं रख पाते और वह कन्या पूजन करते हैं तो उन्हें भी नौ दिन के व्रत रखने वालों के जितना ही फल मिलता है। कन्या पूजन नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को किया जाता है। इस बार यह दोनों ही तिथियां 25 मार्च को पड़ रही हैं। हालांकि कुछ लोग इसे सप्तमी वाले दिन भी कर लेते हैं।
क्या होती है कन्याओं की सही उम्र
अगर कन्या पूजन के लिए कन्याओं की सही उम्र की बात करें तो उनकी उम्र 2 से 10 साल के बीच होनी चाहिए। कन्याओं का अविवाहित होना जरूरी है। नौ कन्याओं(कंजकों) के साथ एक लड़के की भी पूजा होती है, इन्हें हनुमानजी का रूप माना जाता है।
जिस तरह देवी की पूजा भैरव की पूजा बिना अधूरी रहती है वैसे ही कन्याओं की पूजा में एक बालक का शामिल होना जरूरी है। इनका सत्कार करना, कन्याओं के जैसे ही भोजन कराना बहुत जरूरी होता है। क्या आपको पता है कि हर उम्र की कन्याओं का भी अपना ही एक खास महत्व है।
- 2 वर्ष की कन्या के पूजन से दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं।
- 3 साल की कन्याओं की पूजा से मां आपका घर धन-धान्य से परिपूर्ण रखती हैं। परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
- 4 साल की बच्ची के पूजन से परिवार का कल्याण होता है।
- 5 साल की कंजक के पूजन से परिवार में सभी रोगमुक्त रहते हैं क्योंकि ऐसी कन्या को रोहिणी कहा जाता है।