मुरादनगर में रविवार दोपहर श्मशान घाट के प्रवेश द्वार के साथ बने गलियारे की छत गिरने से मलबे में दबकर 23 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। एनडीआरएफ, पुलिस और पीएसी ने करीब पांच घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। श्मशान में 55 लाख की लागत से गलियारे का निर्माण हुआ था और करीब पंद्रह दिन पहले ही इसे जनता के लिए खोला गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश देते हुए रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने और घायलों के उचित इलाज कराने की घोषणा की है।
गाजियाबाद: 60 लाख में बना था 'भ्रष्टाचार का श्मशान घाट', अब मृतकों के परिजनों को लगाया जाएगा दो-दो लाख का 'मलहम'
मुरादनगर के उखलारसी गांव की संगम विहार कॉलोनी निवासी जयराम (70) का रविवार को निधन हो गया था। सुबह करीब 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा घर से शुरू हुई और करीब पौने 11 बजे मुरादनगर के बंबा रोड श्मशान घाट पहुंची। अंतिम संस्कार में मोहल्ले और आसपास के इलाकों के करीब 50 लोग शामिल थे। अंतिम संस्कार के दौरान बारिश होने के कारण अधिकांश लोग श्मशान घाट के प्रवेश द्वार पर बने 70 फीट लंबे गलियारे में खड़े थे। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद करीब 11:30 बजे इस गलियारे में दो मिनट के मौन के लिए सभी लोग जमा हुए। इसी दौरान गलियारे की छत भरभरा कर गिर गई। कुछ लोग बाहर निकल गए थे, लेकिन करीब 40 लोग मलबे के नीचे दब गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस, पीएसी ने स्थानीय लोगों के साथ बचाव एवं राहत कार्य शुरू किया। इस दौरान एनडीआरएफ की टीम डॉग स्क्वॉड के साथ मौके पर पहुंची और मलबे को हटाया। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाल कर जिला एमएमजी अस्पताल समेत कई अन्य अस्पतालों में भेजा गया। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है जबकि 15 लोग घायल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंडल आयुक्त मेरठ व एडीजी मेरठ मामले की जांच कर रहे हैं। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों ही अधिकारी मुरादनगर में डेरा डाले हुए हैं। टेंडर से लेकर अन्य सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
15 दिन पहले खोली गई थी शटरिंग
मुरादनगर में श्मशान घाट में गलियारे की छत डालने का काम अक्तूबर में शुरू हुआ था। करीब 15 दिन पहले शटरिंग खोली गई थी। इससे पहले लोगों का आवागमन इसके बगल में लगे श्मशान घाट के छोटे गेट से हो रहा था। शटरिंग खुलने के बाद इस गेट से लोगों का आवागमन शुरू हुआ था। अभी इसका लोकार्पण भी नहीं हुआ है। नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी निहारिका चौहान ने बताया कि इस गलियारे के निर्माण के लिए करीब 55 लाख का टेंडर जारी हुआ था। नगर निगम के ठेकेदार अजय त्यागी ने इसका निर्माण किया था।
मंडलायुक्त-आईजी पहुंचे घटनास्थल पर
अंतिम संस्कार के दौरान हुए हादसे की गूंज लखनऊ तक पहुंची। शासन ने मंडलायुक्त-आईजी समेत डीएम-एसएसपी मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत और बचाव कार्य कराया। वहीं, हादसे के कारणों की भी पड़ताल शुरू कर दी गई। शासन ने देर रात तक इस हादसे की रिपोर्ट मांगी है।