बड़ी-बड़ी लुढ़कती चट्टानों के बीच जब सामने खड़ी थी इनकी मौत
‘25 अप्रैल को 12 बजे दिन में एकाएक हिमस्खलन होने लगा। जोर-जोर से आवाजें आने लगीं। पहाड़ हिलने लगे। भारी हलचल होने लगी। बर्फ की बड़ी-बड़ी़ चट्टानें हमारी ओर लुढ़कते हुए आ रही थीं। पैरों के नीचे से नीली बर्फ फट रही थी। एकबारगी ऐसा लगा कि अब जिंदा बचना मुश्किल है।’
बड़ी-बड़ी लुढ़कती चट्टानों के बीच जब सामने खड़ी थी इनकी मौत
दुनिया की पांचवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मकालू फतह अभियान को भूकंप की वजह से बीच में छोड़कर नोएडा वापस लौटे पर्वतारोही अर्जुन वाजपेयी मंगलवार को खौफनाक मंजर बयां कर रहे थे। अर्जुन ने बताया कि 11 अप्रैल को काठमांडू से माउंट मकालू की चोटी फतह करने निकले थे। टीम में आस्ट्रिया, स्पेन, जापान, चीन, कनाडा और अमेरिका के 12 अन्य सदस्य थे। तुमलिंग तार से चढ़ाई शुरू हो जाती है।
बड़ी-बड़ी लुढ़कती चट्टानों के बीच जब सामने खड़ी थी इनकी मौत
23 अप्रैल को 19500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मकालू के एडवांस बेस कैंप पर पहुंचे। 25 अप्रैल को करीब 12 बजे दिन में कैंप में अपने चार साथियों के साथ बैठे हुए थे। तभी कुछ हलचल का अहसास हुआ। एकाएक जोर-जोर से आवाजें आने लगीं। सभी भागकर कैंप से बाहर निकले।
बड़ी-बड़ी लुढ़कती चट्टानों के बीच जब सामने खड़ी थी इनकी मौत
23 अप्रैल को 19500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मकालू के एडवांस बेस कैंप पर पहुंचे। 25 अप्रैल को करीब 12 बजे दिन में कैंप में अपने चार साथियों के साथ बैठे हुए थे। तभी कुछ हलचल का अहसास हुआ। एकाएक जोर-जोर से आवाजें आने लगीं। सभी भागकर कैंप से बाहर निकले।
बड़ी-बड़ी लुढ़कती चट्टानों के बीच जब सामने खड़ी थी इनकी मौत
बाहर का नजारा देखकर इनके होश उड़ गए। सभी को पहाड़ हिलता नजर आया। हिम स्खलन होने लगा। बर्फ की बड़ी-बड़ी चट्टानें लुढ़कती हुई नीचे की ओर आ रही थीं। सभी को अपने उन साथियों की चिंता होने लगी जो उनसे कुछ ऊपर थे। इनको यही लगा कि इस भयानक हादसे के बाद कोई नहीं बचा होगा। काफी नुकसान हुआ होगा। लेकिन 12 घंटे के बाद पता चला कि किसी को नुकसान नहीं हुआ है।