हम दिल दे चुके सनम, जोधा-अकबर, देवदास व लगान फिल्म के सेट निर्माता नितिन चंद्रकांत देसाई ने श्री-श्री रविशंकर के वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव का भव्य सेट तैयार किया है। इस सेट को बनाने में ढाई महीने का समय लगा है, जबकि तैयारी एक साल से जारी थी। सेट का डिजाइन मुंबई में तैयार किया गया है। सेट की थीम नव, जल और तल है, जिसके माध्यम से इंद्रलोक की भी तारीफ मिलने का दावा किया जा रहा है।
जानिए क्या है मंच की खासियत
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आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम की तैयारी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
समारोह स्थल पर ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में नितिन चंद्रकांत देसाई ने बताया कि सात एकड़ में बनने वाले इस मंच पर 50 हजार आदमी भी बैठ जाएंगे तो भी यह नहीं टूटेगा।
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आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम की तैयारी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन के मुताबिक, फिल्मों के सेट बनाना बेहद आसान है, लेकिन ऐसे महोत्सव का मंच बनाने से पहले सुरक्षा से लेकर लेकर अन्य तैयारियों का भी जायजा लेना पड़ता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मंच होगा और गिनीज बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराएगा। फिल्म का मंच बनाने में कंप्यूटर की तकनीक बेहतरीन लुक देती है, लेकिन यहां असल मंच में जो होगा, वही दिखेगा।
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आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम की तैयारी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
मंच को नव, जल और तल इसलिए कहा है, क्योंकि आसमां से लेकर वायु और जमीन की बेहतरीन जुगलबंदी में दर्शकों को शांति के संदेश के बीच भारतीय पारंपरिक वाद्य संगीत और नृत्य की ताल से दुनिया को रूबरू करवाया जाएगा। कार्यक्रम प्रस्तुति के दौरान दर्शकों को मंच के पीछे पानी का समावेश भी देखने को मिलेगा।
मंच को कई खंड में बांटा गया है
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
मंच को कई खंड में बांटा गया है, जैसे एक में तबला, ढोल आदि से जुड़े वाद्य यंत्र तो बी में सितार, वीणा और डी में हारमोनियम। अलग वर्गों में रखने का मुख्य मकसद यह कि हर वाद्ययंत्र जब बजता है तो हवा के साथ उसके अलग सुर निकलते हैं। इसलिए मंच पर हर वाद्य यंत्र को अलग-अलग स्थान दिया गया है।