जब अस्पताल में भर्ती था उम्मीदवार, हमशक्ल से करवाया प्रचार और जीत गए चुनाव
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यह वाकया चांदनी चौक लोकसभा के 1991 के चुनाव का है। ताराचंद खंडेलवाल उस दौरान चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव प्रचार के बीच में ही उन्हें हार्ट अटैक आया और वह दक्षिणी दिल्ली स्थित अस्पताल में भर्ती हो गए। अफवाह उड़ी कि प्रत्याशी तो दिखाई ही नहीं पड़ रहे हैं तो डोर-टू-डोर कैंपेन कैसे किया जाए। इस तरह तो चुनाव ही हार जाएंगे।
कार्यकर्ताओं ने ताराचंद खंडेलवाल की तरह की शक्ल वाले एक शख्स को ढूंढ निकाला। वासुदेव नाम के उस कार्यकर्ता की शक्ल हूबहू मिलती-जुलती थी। उन्हें ही फूलमाला पहनाकर मतदाताओं के बीच कार्यकर्ता ले जाते थे। उनका लिबास भी खंडेलवाल की तरह ही बनाया गया था।
ताराचंद ने चुनाव जीता भी। सिटीजन काउंसिल दिल्ली जैसे समाजसेवी संगठन के खंडेलवाल संस्थापक थे। पटेल चौक पर वह बराबर सरदार पटेल की जयंती मनाते थे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी शिरकत करते थे।
नोट: आपातकाल के विरोध में महज 17 साल की उम्र में जेल की सलाखों के पीछे रहे धर्मवीर शर्मा से अमर उजाला के संवाददाता नवनीत शरण से बातचीत के आधार पर।