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जब अस्पताल में भर्ती था उम्मीदवार, हमशक्ल से करवाया प्रचार और जीत गए चुनाव

Mon, 18 Mar 2019 05:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 18 Mar 2019 05:06 PM IST
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lok sabha elections flashback when tarachand got heart attack his duplicate campaign and won seat
ताराचंद खंडेलवाल - फोटो : सोशल मीडिया
दिल्ली में कई चुनाव ऐसे लड़े गए, जिसे सुन का आप अचंभित रह जाएंगे। प्रत्याशी मतदान की तारीख तक अस्पताल के बिस्तर पर रहे और उनका चुनाव प्रचार हमशक्ल करता रहा। हैरत की बात है कि जनता भी नहीं समझ पाई कि वह प्रत्याशी नहीं है। पढ़ें क्या था पूरा माजरा...
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ताराचंद खंडेलवाल - फोटो : सोशल मीडिया

यह वाकया चांदनी चौक लोकसभा के 1991 के चुनाव का है। ताराचंद खंडेलवाल उस दौरान चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव प्रचार के बीच में ही उन्हें हार्ट अटैक आया और वह दक्षिणी दिल्ली स्थित अस्पताल में भर्ती हो गए। अफवाह उड़ी कि प्रत्याशी तो दिखाई ही नहीं पड़ रहे हैं तो डोर-टू-डोर कैंपेन कैसे किया जाए। इस तरह तो चुनाव ही हार जाएंगे।

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ताराचंद खंडेलवाल

कार्यकर्ताओं ने ताराचंद खंडेलवाल की तरह की शक्ल वाले एक शख्स को ढूंढ निकाला। वासुदेव नाम के उस कार्यकर्ता की शक्ल हूबहू मिलती-जुलती थी। उन्हें ही फूलमाला पहनाकर मतदाताओं के बीच कार्यकर्ता ले जाते थे। उनका लिबास भी खंडेलवाल की तरह ही बनाया गया था। 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मतदाताओं से बातचीत भी करते थे, लेकिन उस दौर में तनिक भी मतदाताओं को पता नहीं चल पा रहा था कि वह ताराचंद नहीं हैं। चुनाव वाले दिन जब अफवाह तेज हुई कि ताराचंद तो चुनाव प्रचार में है ही नहीं तो चुनाव प्रभारियों ने आनन-फानन में अस्पताल से ताराचंद खंडेलवाल को छुट्टी दिलवाई और उन्हें पोलिंग बूथ पर ले जाया गया।
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फाइल फोटो

ताराचंद ने चुनाव जीता भी। सिटीजन काउंसिल दिल्ली जैसे समाजसेवी संगठन के खंडेलवाल संस्थापक थे। पटेल चौक पर वह बराबर सरदार पटेल की जयंती मनाते थे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी शिरकत करते थे।

नोट: आपातकाल के विरोध में महज 17 साल की उम्र में जेल की सलाखों के पीछे रहे धर्मवीर शर्मा से अमर उजाला के संवाददाता नवनीत शरण से बातचीत के आधार पर।

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