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दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है

Tue, 14 Oct 2014 03:58 PM IST
Updated Tue, 14 Oct 2014 03:58 PM IST
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दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है

life in delhi_night at footpath.

हर साल ढेरों लोग देश के दूसरे राज्यों से रोजी-रोटी की तलाश में देश की राजधानी आते हैं। ग़रीबी के कारण ये लोग रोड को बिस्तर और आसमान को छत बना लेते है। बिरजू बताते हैं कि वो झारखण्ड से हैं और 15 साल की उम्र से दिल्ली में रह कर रिक्शा चला रहे हैं। पैसा बचाने के लिए वो रोड पर ही सोते हैं। (सभी फोटो: बीबीसी हिंदी)

दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है

life in delhi_night at footpath.

तेज-रफ़्तार गाड़ियों से अक्सर रोड पर सोने वालों को हादसों का सामना करना पड़ता है, पर इनके पास कहीं और जाने का रास्ता भी नहीं हैं।

दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है

life in delhi_night at footpath.

चित्ता को याद भी नहीं कि वो कहाँ से आए हैं। वो दिल्ली की सड़कों पर काम करते हुऐ बड़े हुए हैं। उनके यार-दोस्त भी वही हैं जिनका घर-बार राजधानी की सड़कें हैं।

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दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है

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बिरजू और उनके दोस्त कहते हैं कि सड़क पर कौन सोना चाहता है, पर इस शहर में खाने-पीने का ही बंदोबस्त हो जाए वही बहुत है।

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बिरजू कहते हैं कि सरकार की तमाम योजनाएं यहाँ ओवरब्रिज के नीचे सोने वालों तक कभी नहीं पहुँचती।

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