हर साल ढेरों लोग देश के दूसरे राज्यों से रोजी-रोटी की तलाश में देश की राजधानी आते हैं। ग़रीबी के कारण ये लोग रोड को बिस्तर और आसमान को छत बना लेते है। बिरजू बताते हैं कि वो झारखण्ड से हैं और 15 साल की उम्र से दिल्ली में रह कर रिक्शा चला रहे हैं। पैसा बचाने के लिए वो रोड पर ही सोते हैं। (सभी फोटो: बीबीसी हिंदी)
दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है
Updated Tue, 14 Oct 2014 03:58 PM IST
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दर ब दर, बेघर, अपनी तो दिल्ली यही है
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