गर्मियों में रास्ते पर बिकने वाले 10 रुपये के जूस और कटे हुए फलों का असल सच जान देखना भी छोड़ देंगे
नगर निगम और बीके स्थित सिविल सर्जन कार्यालय की नाक के नीचे नीलम से बीके चौक के आसपास सहित शहर में विभिन्न स्थानों पर रेहड़ियों पर बिना ढके पपीता तरबूज खरबूज व अन्य फल बेचे जा रहे हैं। इन पर हर समय मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। सफाई के नाम पर वहां कुछ नहीं है। आंधी चलने से धूल व मिट्टी फलों पर व रस के अंदर जाती रहती है।
गन्ने का रस निकालने के थोड़े समय बाद ही काला हो जाता है। जागरूकता के अभाव में यह रस भी ग्राहकों को पिला दिया जाता है। यही फल व रस बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं। सुबह.शाम इन्हीं रास्तों से आने.जाने वाले जिम्मेदार अफसर भी चौराहे पर बिकी रही इस श्ठंडी बीमारीश् की ओर से अनजान बने हुए हैं।
इस मामले में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पृथ्वी सिंह गर्मियों में इस प्रकार शीतल पेय और फल बेचने वालों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। पेय पदार्थों की सैंपलिंग कराई जाएगी। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सर्वोदय अस्पताल की वरिष्ठ डाइटिशियन मीना कुमारी बताती हैं कि गर्मी से बचने के लिए हम धूप में ठंडी चीजें पी लेते हैंए मगर बाजार में खुले में बिकने वाले पय पदार्थ जैसे गन्ने का रसए शिकंजीए आदि में किस तरह का पानी इत्यादि इस्तेमाल हो रहा हैए हमें पता नहीं होता। ऐसे में इससे पेट की बीमारियों के अलावा सर्द.गर्म होने का भी खतरा रहता है। धूप में निकलने के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए तरल पीना लाजमी है लेकिन शरीर तापमान को अनुकूल करने के बाद ही ये उपाय फायदेमंद होगा। डाण् मीना बताती हैं कि किसी भी बाह्य तरल के फायदे से ज्यादा नुकसान हैं। बाहर मिलने वाला गन्ने का जूस डायरियो को बढ़ावा देता है। पेय पदार्थ विक्रेता साफ.सफाई का इंतजाम नहीं रख पाते जिसके कारण तरल के फायदे भी नुकसान में बदल जाते हैं। ऐसे में घर से निकलते समय घर से ही पेय पदार्थ लेकर चलें।