राष्ट्रपति के पास से निर्भया के दोषियों की दया याचिका खारिज होते ही उनकी फांसी की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। याचिका खारिज होते ही जेल नंबर-दो और चार में बंद दोषियों को जेल नंबर-तीन स्थित डेथ सेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जेल नंबर-तीन में 16 डेथ सेल हैं और इसी में फांसी घर भी है। इन डेथ सेल में दोषियों को अकेला रखा जाता है और 24 घंटे में एक बार बाहर निकाला जाता है।
दया याचिका खारिज होते ही डेथ सेल में शिफ्ट हो जाएंगे निर्भया के दोषी, जानें फांसी की प्रक्रिया
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दोषियों पर विशेष निगरानी
तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवान इन पर विशेष निगरानी रखेंगे, ताकि दोषी खुदकुशी का प्रयास न कर सकें। डेथ सेल में बंद दोषियों को नाड़ा वाला पायजामा तक पहनने की इजाजत नहीं होगी। निर्भया के सभी गुनाहगारों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। दिल्ली में अब तक एक साथ पहली बार चार गुनाहगारों को फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे पहले 1982 में रंगा बिल्ला को फांसी पर लटकाया गया था।
ब्लैक वारंट के लिए अदालत से गुहार
तिहाड़ जेल के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दया याचिका खारिज होने के बाद जेल प्रशासन ब्लैक वारंट यानी मौत के पैगाम के लिए अदालत से गुहार लगाएगा। जेल प्रशासन के सुझाव और तैयारियों को देखकर अदालत फांसी की तारीख और वक्त मुकर्रर करेगी। इसके बाद जेल प्रशासन जल्लाद के इंतजाम में जुट जाएगी। देश में पिछले सालों में तीन फांसी कसाब, अफजल गुरू और याकूब मेमन को दी गई है। फांसी किसी पेशेवर जल्लाद ने नहीं, बल्कि जेल के कर्मचारी ने दी।
मंडोली जेल में फांसी देने का इंतजाम नहीं
याचिका खारिज होने से पहले ही जेल प्रशासन मंडोली जेल में बंद पवन को तिहाड़ जेल ला चुका है, क्योंकि मंडोली जेल में फांसी देने का इंतजाम नहीं है। फांसी से एक-दो दिन पहले दोषियों को डेथ सेल से दूसरे सेल में डाल दिया जाता है, ताकि वह सेल के करीब बने फांसी घर में चल रहे ट्रायल को नहीं देख सके।
तिहाड़ में इससे पहले एक साथ चार दोषियों को फांसी नहीं मिली
तिहाड़ जेल में इससे पहले कभी भी एक साथ चार दोषियों को फांसी नहीं दी गई है। आखिरी बार 31 जनवरी 1982 में रंगा-बिल्ला को एक साथ फांसी दी गई थी। जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि तिहाड़ प्रशासन एक साथ चार दोषियों को फांसी देने को लेकर तैयारी कर रहा है। इससे पहले पुणे के यड़बड़ा जेल में वर्ष 1983 में दस लोगों की हत्या के चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई थी।