यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसानों का गुस्सा एकदम यूं ही नहीं फूट पड़ा। केंद्र में वर्ष 2014 में नई सरकार का गठन हुआ तो किसानों ने भी साढ़े चार साल इंतजार किया। भाजपा के चुनावी एजेंडे के लागू होने की आस टूटती दिखाई दी तो सरकार की इस बेरुखी पर किसानों का दर्द छलका और वह सड़कों पर उतर आए। किसानों ने केंद्र सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराकर जता दिया कि उनके मुद्दों पर बेरुखी भारी पड़ सकती है।
किसान क्रांति पदयात्रा: चुप रही सरकार तो किसानों ने भरी हुंकार, ये हैं भाकियू की प्रमुख मांगें
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भाकियू की प्रमुख मांगें
- गन्ना भुगतान 14 दिन में होना चाहिए।
- 10 वर्ष पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटे।
- सरकारी रेट से कम मूल्य पर फसल की खरीद करने वाले पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
- तमाम राज्यों में बिजली फ्री है। यूपी में भी किसानों को फ्री बिजली मिले।
- भूमि अधिग्रहण अधिनियम में कोई बदलाव न हो।
- राज्य सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार भी किसानों की कर्ज माफी करे।
- खेती को मनरेगा से जोड़ा जाए, डिजिटल पेमेंट हो और गन्ना भुगतना सीधा बैंकों से जोड़ दिया जाए।
- एग्रीकल्चर 18 मंत्रालयों में बंटा है, केवल एक मंत्रालय को नोडल बनाया जाए।
- किसान को यूनिट मानते हुए फल बीमा का लाभ मिले और 5 से 10 दिन का संसद सत्र सिर्फ किसानों के नाम पर हो।