इन दिनों राजधानी में अपराध की वारदातें काफी तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि इससे पहले भी कई बार दिल्ली कई ऐसी वारदातों से दहली है जो पूरे विश्व मीडिया में सुर्खियां बनीं। ऐसी ही एक वारदात आज से 24 साल पहले हुई थी जिसने न सिर्फ रिश्तों पर से भरोसा उठाया था बल्कि सफेदपोश चेहरों के पीछे का सच भी सबके सामने लाकर रख दिया था। यह घटना थी नैना साहनी हत्याकांड जिसे हम तंदूर कांड के नाम से भी जानते हैं। हमारे सेक्शन खबर जो खो गई के तहत आज पढ़िए क्या थी पूरे देश को दहलाकर रख देने वाले तंदूर कांड की पूरी कहानी...
खबर जो खो गईः 24 साल पहले पति ने पत्नी को तंदूर में रखकर लगा दी थी आग, ऊपर से डालता रहा मक्खन
3 जुलाई 1995 की वो रात...
3 जुलाई, 1995 की उस रात में एक बज चुके थे। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मैक्सवेल परेरा के फोन की घंटी बजी। दूसरी छोर पर उप पुलिस आयुक्त आदित्य आर्य थे। उन्होंने पहले तो देर रात फोन करने के लिए माफी मांगी और फिर बताया कि एक तंदूर में एक शव को जलाने की कोशिश की गई है। परेरा को माजरा समझने में कुछ समय लगा। उन्होंने आर्य पर सवालों की बौछार कर दी, 'क्या? आप होश में तो हैं? किसका शव? कहां? आप कहां हैं इस समय?' आर्य ने जवाब दिया, "मैं इस समय अशोक यात्री निवास होटल में हूं। यहां पर एक रेस्त्रां है बगिया। ये होटल के मुख्य भवन में न हो कर बगीचे में है। मैं वहीं से बोल रहा हूं। आप शायद फौरन मौके पर आना चाहेंगे?" जब मैक्सवेल परेरा अशोक यात्री निवास पहुंचे तो कनॉट प्लेस थाने के एसएचओ निरंजन सिंह, नैना साहनी की लाश का पंचनामा करवा रहे थे।
मक्खन के वो चार स्लैब
परेरा बताते हैं, "बुरी तरह से जली हुई नैना साहनी की लाश बगिया रेस्त्रां के किचन के फर्श पर पड़ी थी। उसको एक कपड़े से ढका गया था। बगिया रेस्त्रां के मैनेजर केशव कुमार को पुलिस वालों ने पकड़ रखा था।" नैना के शरीर का मुख्य हिस्सा जल चुका था। लेकिन आग नैना का जूड़ा नहीं जला पाई थी। आग की गर्मी की वजह से उसकी आंतें पेट फाड़ कर बाहर आ गई थीं। अगर लाश आधे घंटे और जलती तो कुछ भी शेष नहीं रहता और हमें जांच करने में बहुत मुश्किल आती।"
जब नैना साहनी का शव जलाने में दिक्कत आई तो सुशील शर्मा ने बगिया के मैनेजर केशव को मक्खन के चार स्लैब लाने के लिए भेजा। उस समय कनॉट प्लेस थाने के एसएचओ निरंजन सिंह बताते हैं, "नैना साहनी के शव को तंदूर के अंदर रख कर नहीं बल्कि तंदूर के ऊपर रख कर जलाया जा रहा था, जैसे चिता को जलाते हैं।" हवलदार कुंजू ने सबसे पहले जली लाश देखी। उस रात 11 बजे हवलदार अब्दुल नजीर कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल जनपथ पर गश्त लगा रहे थे।
आग की लपटें और धुआं
वो गलती से अपना वायरलेस सेट पुलिस चौकी पर ही छोड़ आए थे। तभी उन्हें अशोक यात्री निवास के प्रांगण से आग की लपटें और धुआं उठता दिखाई दिया। इस समय केरल के शहर कोल्लम में रह रहे अब्दुल नजीर कुंजू याद करते हैं, "आग देख कर जब मैं बगिया रेस्त्रां के गेट पर पहुंचा तो मैंने देखा कि सुशील शर्मा वहां खड़ा था और उसने गेट को कनात से घेर रखा था। जब मैंने आग का कारण पूछा तो केशव ने जवाब दिया कि वो लोग पार्टी के पुराने पोस्टर जला रहे थे।"
"मैं आगे चला गया। लेकिन तभी मुझे लगने लगा कि कुछ गड़बड़ जरूर है। मैं बगिया रेस्त्रां के पीछे गया और सात-आठ फीट की दीवार फलांग कर अंदर आया। वहां केशव ने फिर मुझे रोकने की कोशिश की। जब मैं तंदूर के नजदीक गया तो देखा कि वहां एक लाश जल रही थी।" कुंजू ने बताया कि, "जब मैंने केशव की तरफ देखा तो उसने कहा कि वो बकरे को भून रहा है। जब मैंने उसे बल्ली से हिलाया तो पता चल गया कि वो बकरा नहीं एक महिला की लाश थी। मैंने तुरंत अपने एसएचओ को फोन मिला कर इसकी सूचना दे दी।"
सुशील शर्मा और नैना साहनी के बीच झगड़ा
अब सवाल उठता है कि सुशील शर्मा ने किन परिस्थितियों में नैना साहनी की हत्या की थी और हत्या से तुरंत पहले दोनों के बीच क्या-क्या हुआ था? निरंजन सिंह बताते हैं, "सुशील शर्मा ने मुझे बताया था कि हत्या करने के बाद उसने पहले बॉडी को पहले पॉलीथिन में लपेटा, फिर चादर में रैप किया। लेकिन वो उसे उठा नहीं पाया, इसलिए उसे ड्रैग करके नीचे खड़ी अपनी मारुति कार तक लाया।"
"उसने उसे कार की डिक्की में तो रख लिया, लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे ठिकाने किस तरह लगाना है। पहले उसने सोचा कि वो लाश को निजामुद्दीन ब्रिज के नीचे यमुना नदी में फेंक देगा।" "लेकिन बाद में उसने ये विचार बदल दिया कि कोई उसे ऐसा करते हुए देख न ले। उसे ख्याल आया कि वो अपने ही रेस्तरां में लाश को जलाकर सारे सबूत नष्ट कर दे। उसने सोचा कि उसे ऐसा करते हुए कोई देखेगा नहीं और डेड बॉडी को ठिकाने लगा दिया जाएगा।"