आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के माफीनामों के इस नए शगल का असल मकसद एक शख्स को मनाना है। इनके मान जाने से केजरीवाल व उनके पार्टी की बड़ी समस्या हल हो जाएगी।
...तो इसलिए इन दिनों 'माफीमोड' में हैं केजरीवाल, इन्हें मनाने में लगे हैं दिल्ली CM
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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के माफीनामों के इस नए शगल का असल मकसद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को मनाना है। दरअसल जेटली न सिर्फ हर सुनवाई में खुद उपस्थित रहते हैं, बल्कि जल्द फैसला भी चाहते हैं। केजरीवाल एक-एक कर सभी से माफी मांगने के क्रम में जेटली को भी इस उम्मीद में माफीनामा भेजेंगे कि सबने माफ कर दिया, तो वे भी शायद उन्हें क्षमा कर दें।
हालांकि जेटली के करीबी लोगों का कहना है वे नरमी बरतेंगे, इसकी संभावना भी कम है। इस बीच, एक के बाद एक माफी मांगने के पीछे केजरीवाल समर्थकों की नई दलील है कि वकीलों की भारी फीस अदा कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था। केजरीवाल के करीबी लोगों का दावा है कि पंजाब में बिक्रम सिंह मजीठिया के मानहानि के मामले में वकील ने दो सुनवाई में जिरह की और छह लाख रुपये का बिल थमा दिया। वहीं, अरुण जेटली द्वारा दिल्ली में दायर मानहानि के मुकदमे में केजरीवाल की पैरवी करने के लिए वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी द्वारा भेजे गए दो करोड़ रुपये के बिल का भी अभी भुगतान नहीं हो पाया है।
कुल 36 मामले
आप सूत्रों के अनुसार, देश भर में केजरीवाल के खिलाफ मानहानि के 36 मामले लंबित हैं। इनमें पंजाब में अमृतसर से लेकर केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार द्वारा बंगलूरू में दायर मुकदमा शामिल है। कई मुकदमों में उन्हें उपस्थित होने के निर्देश भी आ रहे हैं। यदि हर माह हर केस में एक बार सुनवाई हो तो भी केजरीवाल सभी मामलों की सुनवाई में नहीं जा सकते। हर मामले की तैयारी में उस समय बयान देने की परिस्थितियां, मौजूदा कागजात और सबूत एकत्र करना शामिल होता है। लंबी कानूनी प्रक्रिया न सिर्फ मुख्यमंत्री का समय ले रही थी बल्कि चंदे केजरीवाल के लिए महंगी भी साबित हो रही थी।
बगावत का था पूर्वानुमान
केजरीवाल के करीबी लोगों का कहना है कि माफी से खड़े होने वाले विवाद का उन्होंने पहले ही पूर्वानुमान लगा लिया था। उन्हें भरोसा था कि पंजाब के अधिकतर विधायक उनकी बातों से सहमत होंगे। रविवार को उनसे मिलने आए पंजाब के 10 विधायकों ने अपने बगावती तेवर त्याग दिए। उनका दावा है कि बाकी लोग एक बार केजरीवाल से बात कर लें तो वे भी शांत हो जाएंगे। हालांकि सभी उनसे सहमत नहीं हैं। आप के पंजाब से चुने एक विधायक का कहना है कि केजरीवाल को महंगे वकील ही क्यों चाहिए। वे पार्टी में मौजूद हिम्मत सिंह शेरगिल काबिल वकील को ही काम क्यों नहीं सौंप रहे हैं। विदेश में पढ़े शेरगिल न सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं बल्कि मजीठिया वाले मामले में संजय सिंह के वकील भी हैं।