कौन बनेगा करोड़पति 11 से गुरुवार को 50 लाख के कठिन सवाल पर शो से क्विट करने वाली और 25 लाख रुपये जीतकर जाने वाली राकेश कौर ऐसी महिला हैं जिनके कायल खुद अमिताभ बच्चन हो गए। वो महिला थीं राकेश शर्मा जो पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल के साथ भी काम कर चुकी हैं। शो के दौरान राकेश शर्मा ने अपने बारे में कई ऐसी बातें बताई जो आपको हंसा सकती है और प्रेरणा भी दे सकती हैं। आइए जानते हैं कि राकेश शर्मा की किस बात के फैन हो गए बिग बी और कैसे उनके नाम की वजह से उन्हें मिली थी राष्ट्रपति भवन में नौकरी...
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राकेश शर्मा ने शो के दौरान बताया कि उन्होंने साल 2002 से लेकर 2007 तक बतौर OSD (Officer on Special Duty) पूर्व राष्ट्रपति के साथ काम किया था। राकेश ने हंसते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में काम करने के दौरान कई बार मेरे सहकर्मी मजाक करते थे कि राष्ट्रपति ने मेरी नियुक्ति ये समझकर की होगी कि किसी पुरुष का नाम है। शो के दौरान राकेश ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें राष्ट्रपति के साथ काम करने का मौका मिलेगा।
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राकेश शर्मा 25 लाख की राशि जीतने में कामयाब रहीं। लाइफलाइन खत्म हो जाने के चलते उन्होंने पचास लाख के सवाल पर रिस्क नहीं लिया। इस दौरान राकेश ने अपनी निजी जिंदगी की कई बातें शेयर कीं। उन्होंने बताया कि एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करना उनकी जिंदगी का ऐसा हिस्सा है जिससे वह हमेशा प्रेरणा लेती रहती हैं। डॉ. कलाम के साथ काम करने के बाद ही उन्होंने सीखा कि इंसान खुद की जरूरतें कुछ कम करके अगर किसी की मदद करता है तो दूसरे की जिंदगी बदल सकती है।
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राकेश शर्मा ने बताया कि जब पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल के आखिरी दिन चल रहे थे उन्होंने एक दिन मुझे बुलाया और अपनी किताब 'ट्री ऑफ लाइफ (Tree of Life)' दी और इसे हिन्दी अनुवाद करने को कहा, लेकिन मैंने असमर्थता जता दी। इस पर डॉ. कलाम ने कहा कि तुम कर सकती हो और तुम ही करोगी। इसके बाद एक साल के प्रयास के बाद उन्होंने 49 कविताओं का हिंदी अनुवाद किया। इसकी एक प्रति उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी दी।
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राकेश शर्मा ने अमिताभ को बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में ओएसडी के पद पर कार्य करते हुए पांच साल में एक भी छुट्टी नहीं ली। सिर्फ यही नहीं अक्सर वह रात में दो-दो बजे तक काम करती थीं। कई बार तो साढ़े 10 बजे घर पहुंचने के बाद भी रात में उन्हें बुला लिया जाता था और उन्हें आना पड़ता था और फिर काम करके वह वापस जाती थीं। वह शनिवार और रविवार को भी कार्यालय में मौजूद रहती थीं।