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Kanjhawala Case: अधूरी रह गई अंजलि की ख्वाहिश, दर्द बयां करते मां की आंखों से छलके पड़ते हैं आंसू

Fri, 06 Jan 2023 08:53 PM IST
Vikas Kumar Vikas Kumar
Updated Fri, 06 Jan 2023 08:53 PM IST
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Kanjhawala Case Anjali wish remained unfulfilled she wanted to give kidney to her mother
अंजलि की मां और नानी - फोटो : अमर उजाला

कंझावला कांड की मृतका अंजलि की ख्वाहिश अधूरी रह गई। वह अपनी बीमार मां को किडनी दान करना चाहती थी, लेकिन घर को संभालने में उलझी अंजलि का इसका मौका नहीं मिल सका। परिवार के लिए वह इतना फिक्रमंद थी कि कोरोना काल में मां की नौकरी छूटने के बाद उसने पूरे परिवार की देखभाल का जिम्मा उठा लिया था। परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते बीते साल जब उसकी शादी की बात चली तो खुद से पहले उसने अपनी छोटी बहन की शादी करवाने का जोर दिया। कुछ महीने पहले उसकी शादी भी करवा दी थी। बेटी के न होने का दर्द बयां करती हुई मां रेखा की आंखों से बेटी की अधूरी ख्वाहिशों पर खून के आंसू छलक पड़े।

Kanjhawala Case Anjali wish remained unfulfilled she wanted to give kidney to her mother
बेटी के हादसे का वीडियो देखती मां - फोटो : अमर उजाला

सुल्तानपुरी में रहने वाली अंजलि अपने छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। मां की सेहत और भाई बहनों की फिक्र इतनी थी आखिरी दम तक उनके बारे में सोचती रही। उसने कहा था कि जब तक दोनों छोटे भाई बड़े होकर आत्मनिर्भर नहीं होते और मां की सेहत में सुधार नहीं होता, मैं शादी नहीं करूंगी। अंजलि की नानी कांता और मां राखी ने अंजलि के बारे में कहा कि उसे परिवार की बहुत चिंता थी।

Kanjhawala Case Anjali wish remained unfulfilled she wanted to give kidney to her mother
अंजलि की मां - फोटो : अमर उजाला

2015 में अंजलि के पिता की मौत के बाद परिवार की वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से मां रेखा ने निजी स्कूल में नौकरी शुरू कर दी। कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छूट जाने के बाद अंजलि ने परिवार की जिम्मेवारी संभाल ली। शादी ब्याह या दूसरे समारो में लोगों के स्वागत से होने की कमाई घर का गुजारा कर रही थी। काम ज्यादा होने पर कभी कभार देरी भी होती थी, लेकिन घरवालों को पता होता था।

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Kanjhawala Case Anjali wish remained unfulfilled she wanted to give kidney to her mother
Delhi case - फोटो : अमर उजाला

जिंदगी की आखिरी किस्त बनी स्कूटी की ईएमआई
अंजली की मां रेखा ने बताया कि उनकी बेटी ने डेढ़ साल पहले किस्त पर एक स्कूटी खरीदी। दिसंबर में किस्त पूरी होने के बाद इसकी एनओसी भी नहीं ले सकी। उसे क्या मालूम था कि स्कूटी की यह किस्त आखिरी होगी। अपनी मेहनत से होने वाली कमाई से स्कूटी खरीदी और खुद के मकान में रहते हुए पूरा परिवार गुजर बसर कर रहा था। अंजलि की मौत से परिवार के लिए मुश्किलें इतनी बढ़ गई हैं कि आगे की देखभाल की चिंता से मां कई बार बेसुध हो जाती है तो बेड पर रहते हुए आंसू भी लगातार बह रहे हैं।

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Delhi Case - फोटो : अमर उजाला

घर का चिराग बुझते ही छाया परिवार के सामने अंधेरा
अंजलि की नानी ने बताया कि बच्चों का जन्म दिल्ली में हुआ। अंजलि ने नौंवी तक पढ़ाई की और फिर परिवार पर बढ़ते वित्तीय बोझ के कारण बड़ी बेटी ने नौकरी की शुरुआत की। अपनी मेहनत की बदौलत पूरे परिवार का बसर कर रही अंजलि के चले जाने से पूरा परिवार को भविष्य की चिंता सताने लगी है। छोटे दो भाइयों की उम्र आठ और 10 साल है तो छोटी बहन की गुनगुन की शादी के बाद दो और छोटी बहनें फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं। अंजलि घर की चिराग थी, जिसके बुझने से पूरे परिवार के सामने अंधेरा छा गया है।

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