उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए पिता, मां ने खो दी सुध
गौतमबुद्ध नगर जनपद के रबूपुरा क्षेत्र के मुरादगढ़ी गांव निवासी जगबीर भी देश के उन 18 जांबाज जवानों से में थे जो मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए। उग्रवादियों से लोहा लेते हुए जान न्यौछावर करने वाले जगबीर ही शहादत की सूचना गांव पहुंचते लोग उनके घर की ओर दौड़ पड़े।
उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए पिता, मां ने खो दी सुध
जेवर तहसील के मुरादगढ़ी निवासी स्वं. होतीलाल के पुत्र जगबीर के शहीद होने की सूचना शुक्रवार सुबह पैतृक गांव में आई थी। परिवार के लोगों ने इसकी जानकारी उसकी पत्नी, बच्चे और मां को नहीं दी। उन्हें बताया गया की उग्रवादियों से मुकाबला करने के दौरान जगबीर घायल हुए हैं। फिलहाल अस्पताल में हैं। पत्नी मंजू को हमले में घायल होने की बात कही गई तो वे मंजू बेहोश हो गईं।
उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए पिता, मां ने खो दी सुध
होश आने पर जगबीर के बारे में पूछा। कुछ देर में फिर से बेसुध हो गईं। मां केला देवी की उम्र 80 साल की है। उन्हें बेटे के जल्द गांव आने का आश्वासन दिया गया। देर शाम तक भी शहीद होने की बात से अनजान उनकी पत्नी समझ नहीं पा रही की कि घर पर लोग इस तरह क्यों आ रहे हैं।
उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए पिता, मां ने खो दी सुध
जगबीर 24 जून 1994 में सेना की सिग्नल रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 15 नवंबर 1996 में उनकी शादी सूरजपुर कस्बे की मंजू के साथ हुई थी। हाल ही में वे असम के मणिपुर में तैनात थे। पत्नी मंजू और बेटा-बेटी के साथ साहिबाबाद के लाजपत नगर के मकान नंबर ए-117 में रहती है। विवेक (14) कक्षा आठ और बेटी रेनू (11) कक्षा छह में केंद्रीय विद्यालय में पढ़ती है।
उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए पिता, मां ने खो दी सुध
जगबीर देश की सेवा करने के लिए गांव आने पर युवाओं को प्रेरित करते रहते थे। 15 अगस्त 2014 को चीफ ऑफ द आर्मी स्टाल का मेडल देकर सेना में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था। 2012 में यूएनओ मेडल से भी सम्मानित किया गया।