मैं अपने परिवार के साथ प्रयागराज जाने के लिए आया था। बेटा मेरे साथ है, लेकिन बेटी और पत्नी का कुछ पता नहीं है। समझ नहीं आ रहा है कहां जाऊं। हालत, बेहद खराब हैं। रेल प्रशासन भी कुछ मदद नहीं कर रहा है। यह कहते हुए योगेश मिश्रा के आंसू थम नहीं रहे हैं। वह रोते हुए बताते हैं कि उनकी ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 15 में थी। एसी-2 की टिकट थी। लेकिन, भीड़ इतनी अधिक थी कि किसी भी बोगी में पैर रखने की जगह नहीं थी। सब लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ रहे थे।
हादसे की इनसाइड स्टोरी: प्लेटफार्म से लेकर सीढ़ी पर हुई अफरा-तफरी, घुटने लगा दम, पैर रखने की भी न मिली जगह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 16 Feb 2025 02:29 AM IST
सार
रेल के टॉयलेट में भी लोग खचाखच भरे हुए थे। कुछ ही दूरी पर खड़ी बिमला देवी बिलखते हुए बताती हैं कि उनके पति हार्ट के मरीज हैं। उन्हें आखिरी बार 10 बजे देखा था, उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है।
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