अमेरिका के बाद अब भारत में भी तेजी से चेहरे के ऑपरेशन बढ़ रहे हैं। कुछ सालों में ही सरकारी व निजी अस्पतालों में प्लास्टिक सर्जरी के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी (आईएसएपीएस) के अनुसार, भारत में वर्ष 2015 में 9,35,487 कास्मेटिक सर्जरी हुई है।
इस लिहाज से दुनिया भर में देश का स्थान चौथा है। जबकि पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: अमेरिका, ब्राजील और दक्षिण कोरिया हैं। कुछ दिन पहले एम्स में केडेवेरिक कार्यशाला में चिकित्सकों ने इसको लेकर गंभीरता जताई है। डॉक्टरों ने बताया कि देश के किसी अस्पताल में पहली बार यह कार्यशाला हुई है। सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों ने भी सहभागिता की थी। कार्यशाला में मोरक्को और ताइवान के विशेषज्ञ भी मौजूद थे।
तीन गुना बढ़े मामले
प्लास्टिक सर्जरी विभाग प्रमुख डा. मनीष सिंघल का कहना है कि चेहरे की विभिन्न संरचनाओं और रक्त नलिकाओं से संबंध का अध्ययन करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डा. राजा तिवारी का कहना है कि पिछले एक दशक में एम्स में कास्मेटिक उपचार कराने वाले मरीजों की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है।
इंजेक्शन भी ले रहीं महिलाएं
एम्स ट्रामा सेंटर प्रमुख डा. राजेश मल्होत्रा की मानें तो खूबसूरती की चाह ने प्लास्टिक सर्जरी को बढ़ावा दिया है। आंखों के नीचे काले घेरों को हटाने के लिए अब इंजेक्शन ले रहे हैं। महिलाएं इसका इस्तेमाल ज्यादा कर रही हैं। वहीं, जागरूकता नहीं होने की वजह से कई बार गलत नलिकाओं में लगने से इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।